ईरान की विदेश नीति में इराक को विशेष महत्व क्यों प्राप्त है?
इराक के संसद सभापति ने अपनी तेहरान यात्रा के दौरान इस्लामी गणतंत्र ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों से सहकारिता को विस्तृत करने के बारे में भेंटवार्ता की है।
इराक के संसद सभापति मोहम्मद हलबूसी ने ऐसे समय में ईरान की यात्रा की है जब दोनों दोनों के अधिकारी समस्त क्षेत्रों में सहकारिता को अधिक से अधिक विस्तृत करने का इरादा रखते हैं।
ईरान और इराक दो पड़ोसी देश हैं और दोनों देशों के मध्य बहुत अधिक धार्मिक और सांस्कृति समानतायें हैं जिसके कारण दोनों देशों के अधिकारियों ने द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत बनाये जाने की दिशा में क़दम उठाये हैं।
इराक ईरान का पड़ोसी देश है और उसके साथ संबंधों को ईरान की विदेश नीति में विशेष महत्व प्राप्त है। ईरान इराक को स्ट्रैटेजिक दृष्टि से देखता है और उसकी सुरक्षा को अपनी सुरक्षा समझता है।
इसी कारण जब आतंकवादी गुट दाइश ने इराक में अपना तांडव मचाया और उसके कई नगरों पर कब्ज़ा कर लिया तो ईरान इराकी सरकार के आह्वान पर उसकी सहायता के लिए गया और दोनों देशों ने एक दूसरे से सहकारिता करके इराक से आतंकवादी गुट दाइश का सफाया कर दिया।
अब इराक को दाइश के बाद के नये चरण का सामना है और इराक को अपेक्षा है कि ईरान यथावत इराक में अपनी रचनात्मक भूमिका को जारी रखेगा।
दोनों देशों के मध्य लंबी संयुक्त सीमा, धार्मिक और सांस्कृतिक समानताएं और इसी प्रकार इराकी मंडियों तक ईरान की सरल पहुंच वे चीज़ें हैं जिसके कारण दोनों देशों ने सहकारिता को मज़बूत और विस्तृत करने की दिशा में कदम उठाये हैं।
ईरान ने एक भरोसेमंद पड़ोसी देश के रूप में इराक की मौलिक आवश्यकताओं की आपूर्ति की है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जो प्रतिबंध लगाया है उसके बारे में इराक ने कहा है कि वह अमेरिकी नीतियों का अनुसरण नहीं करेगा।
इराक के स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण से तेहरान और बगदाद दोनों विशेषकर ऊर्जा के क्षेत्र में सहकारिता को अधिक विस्तृत व प्रगाढ़ बनाने का पक्का इरादा रखते हैं। MM