जेहाद और आतंकवाद में 5 बुनियादी अंतर!
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आजकी दुनिया में विशेष रूप से साम्राज्यवादी मीडिया में आतंकवाद को जेहाद और आतंकवादियों को जेहादी कह कर इस्लामी धर्म को बदनाम करने की घिनौनी साज़िश जारी है। जो लोग जेहाद के बारे में नहीं जानते हैं उनके लिए यह लेख उपयोगी सिद्ध होगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar ११, २०१९ १६:२४ Asia/Kolkata
  • जेहाद और आतंकवाद में 5 बुनियादी अंतर!

आजकी दुनिया में विशेष रूप से साम्राज्यवादी मीडिया में आतंकवाद को जेहाद और आतंकवादियों को जेहादी कह कर इस्लामी धर्म को बदनाम करने की घिनौनी साज़िश जारी है। जो लोग जेहाद के बारे में नहीं जानते हैं उनके लिए यह लेख उपयोगी सिद्ध होगा।

आतंकवाद, ताक़त के उस इस्तेमाल को कहा जाता है जो वैध क़ानूनी सिद्धांतों के विपरीत होता है और इसी लिए यह प्रायः गुप्त रूप से अंजाम दिया जाता है जबकि जेहाद एक वैध व क़ानूनी काम है जो लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए होता है और खुल कर किया जाता है। कभी कभी एेसा ज़ाहिर करने की कोशिश की जाती है कि जेहाद और आतंकवाद दोनों के लक्ष्य एकसामन हैं जबकि दोनों में बहुत अधिक अंतर है। आतंकवाद के लिए "टेररिज़्म" शब्द का प्रयोग होता है जो फ़्रेंच शब्द "टेरर" से लिया गया है जिसका अर्थ है हथियारों के माध्यम से राजनैतिक हत्या और आतंकवाद वह व्यक्ति होता है जो हिंसा, भय व आतंक फैलाने का पक्षधर हो। अरबी भाषा में इसके लिए "इरहाब" शब्द इस्तेमाल होता है और आतंकी को इरहाबी कहा जाता है।

 

जेहाद और आतंकवाद में अंतरः

  1. आतंकवाद वह काम है जो अमानवीय लक्ष्यों के लिए लोगों की सुरक्षा को ख़तरे में डाल कर किया जाता है और लोगों के अधिकारों का हनन करता है। दूसरे शब्दों में लोगों की सुरक्षा छीनने को आतंकवाद कहा जा सकता है जो मानवता के विरुद्ध अपराध है जबकि इस्लाम में जेहाद इसके ठीक विपरीत लक्ष्य के लिए किया जाता है अर्थात सुरक्षा स्थापित करने या सुरक्षा बहाल करने के लिए।
  2. आतंकवाद, ताक़त के उस प्रयोग व हिंसक कार्यवाही को कहते हैं जो ग़ैर क़ानूनी होती है और इसी लिए प्रायः गोपनीय ढंग से की जाती है जबकि जेहाद एक वैध व क़ानूनी काम है जो मनुष्य के स्वाभाविक अधिकारों की रक्षा के लिए खुल्लम खुल्ला किया जाता है।
  3. आतंकवाद एक अमानवीय काम है और मनुष्य की अंतरात्मा तथा क़ानूनी संस्थाएं इसकी निंदा करती हैं जबकि जेहाद मानवीय कामों की पंक्ति में आता है और धर्म व क़ानून इसकी पुष्टि करते हैं।
  4. इस्लाम के दंडात्मक आदेशों में आतंकवादी की सज़ा मौत है जबकि जेहाद करने वाले या मुजाहिद को स्वर्ग में उच्च स्थान मिलता है।
  5. आतंकवादी कार्यवाही में निर्दोष लोगों की जान, माल और इज़्ज़त पर हमला किया जाता है जो इस्लामी की दृष्टि से निंदनीय है जबकि जेहाद में लोगों की इज़्ज़त या माल पर हमला नहीं किया जाता।

पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के पौत्र इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम कहते हैं कि जब भी पैग़म्बर, सेना को जेहाद के लिए भेजते थे तो सिपाहियों से कहते थेः धोखा न देना, धूर्तता न करना, शवों को क्षत-विक्षत न करना, वृद्धों, बच्चों व महिलाओं की हत्या न करना और जब तक मजबूर न हो जाना पेड़ों को न काटना। इसी तरह वे अनेकेश्वरवादियों की ज़मीन पर ज़हर (रासायनिक हथियार) इस्तेमाल करने से भी मना करते थे। (HN)