आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका कितना गंभीर?
ईरान के सशस्त्र बल के कमान्डर मेजर जनरल मोहम्मद बाक़ेरी ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई पर बल दिया है।
ईरान के सशस्त्र बल के कमान्डर मेजर जनरल मोहम्मद बाक़ेरी ने अलआलम टीवी चैनल से बातचीत में सीरिया की राजधानी दमिश्क़ में अपने इराक़ी समकक्ष और सीरिया के रक्षा मंत्री के साथ त्रिपक्षीय बैठक की ओर इशारा करते हुए बताया कि इस बैठक में संयुक्त सीमाओं पर सुरक्षा क़ायम करने के लिए आतंकियों के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए हर तरह के समन्वय पर सहमति हुयी।
तेहरान-दमिश्क़ संबंध आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में रणनैतिक अहमियत रखते हैं। जैसा कि इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार असद के हालिया तेहरान दौरे पर, सीरिया में प्रतिरोध के मोर्चे की सफलता को अमरीकियों के क्रोधित होने का कारण बताया, अमरीकियों ओर से नई साज़िश की कोशिश का उल्लेख किया और इराक़-सीरिया की सीमा पर प्रभावी मौजूदगी के लिए अमरीका के कार्यक्रम को उसकी साज़िश का नमूना बताया। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने बल दिया कि ईरान-सीरिया एक दूसरे के रणनैतिक भागीदार हैं और प्रतिरोध के मोर्चे की शक्ति इस निरंतर संपर्क व रणनीति पर निर्भर है, इसलिए दुश्मन अपनी साज़िश को व्यवहारिक नहीं कर पाएंगे।
जैसा कि पश्चिम एशिया मामले में मशहूर टीकाकार अब्दुल बारी अतवान ने इस बिन्दु की ओर इशारा करते हुए कि 2019 क्षेत्र के लिए महा सफलता और क्षेत्र में अमरीकी साज़िशों की नाकामी का साल होगा, कहा कि जो लोग अमरीकी सरकार के भीतर और बाहर सीरिया से अमरीका के बाहर निकलने के विरोधी हैं वास्तव में वे इस्राईल के हितों की रक्षा और उसकी स्थिरता चाहते हैं, उनका लक्ष्य आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई या पश्चिम एशिया में अमरीकी हितों की रक्षा नहीं है।
बहुत से राजनैतिक टीकाकारों का मानना है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में इराक़, सीरिया और ईरान के बीच सहयोग व समन्वय का इस लड़ाई की प्रक्रिया पर बहुत असर पड़ा है। (MAQ/T)