वर्चस्ववादी शक्तियां ईरान पर निराधार आरोप क्यों मढ़ती हैं?
अमेरिकी विदेशमंत्री ने ईरान के खिलाफ जो दावा किया है वह कोई नई बात नहीं है और न तो यह पहली बार है और न आखिरी बार होगा।
ईरानोफोबिया नीति के परिप्रेक्ष्य में अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने एक बार फिर ईरान पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप मढ़ा है। साथ ही उन्होंने पश्चिम एशिया में ईरान की भूमिका को विनाशकारी बताया है।
इसी प्रकार उन्होंने दावा किया है कि ईरान/ इराक, सीरिया, यमन और दूसरे क्षेत्रों में युद्ध को विस्तृत करने के लिए अपनी संभावनाओं का प्रयोग करेगा। उसके बाद अमेरिकी विदेशमंत्री ने दावा किया कि हूसियों ने ईरान निर्मित दसियों मिसाइलों को सऊदी अरब की ओर फायर किया है और सऊदी यमनी मिसाइलों से अपनी रक्षा कर रहे हैं।
अमेरिकी विदेशमंत्री ने ईरान के खिलाफ जो दावा किया है वह कोई नई बात नहीं है और न तो यह पहली बार है और न आखिरी बार होगा। अमेरिका के अतिवादी अधिकारी पश्चिम एशिया में अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने के लक्ष्य से अपनी विफलता का औचित्य दर्शाने के लिए ईरान को लक्ष्य बनाते हैं।
पश्चिम एशिया में ईरान की स्ट्रैटेजी और रचनात्मक भूमिका अमेरिका और उसके वर्चस्ववादी घटकों की नीतियों के विफल होने का कारण बनी है। दूसरे शब्दों में अमेरिका और उसके घटकों की वर्चस्वादी नीतियों के मार्ग की सबसे बड़ी रुकावट ईरान है।
ईरान की रचनात्मक भूमिका के कारण इराक और सीरिया से आतंकवादियों का सफाया संभव हो सका है और इन दोनों देशों के आधिकारिक आह्वान पर ईरान उन्हें सैन्य परामर्श दे रहा है। ईरान की रचनात्मक भूमिका ने सीरिया और इराक में आतंकवाद से मुकाबले में पश्चिम विशेषकर अमेरिकी भूमिका का पर्दा फाश कर दिया है।
विभिन्न रिपोर्टें इस बात की सूचक हैं कि इराक में आतंकवादी गुट दाइश को बनाने में अमेरिका का हाथ था और सीरिया में इस आतंकवादी गुट की उपस्थिति में अमेरिका की भूमिका थी।
इस संबंध में अभी हाल ही में एक पुराने अमेरिकी सैनिक ने अपने खुले पत्र में वर्ष 2003 से 2011 तक दाइश की सहायता करने में अमेरिका की गुप्त सहायता के पहलुओं को उजागर किया है।
विनसेन्ट एमोनोएल ने अपने पत्र में लिखाः एक सैनिक के रूप में दाइश को बनाने में हमने सहायता की है और मध्यपूर्व में अमेरिकी सेना द्वारा जो अपराध अंजाम दिये गये हैं वह दाइश के बनने का कारण बना है।"
इराक युद्ध में अमेरिकी सैनिक की स्वीकारोक्ति आतंकवाद से मुकाबले के संबंध में अमेरिका के दोहरेपन का स्पष्ट नमूना है और इसके अलावा भी बहुत से नमूने हैं जो इस बात के सूचक हैं कि आतंकवाद से मुकाबले में अमेरिका सच्चा नहीं है। MM