ईरान और रूस के मध्य सकारात्मक सहयोग और अमरीका की नाराज़गी
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इस्लामी  गणतंत्र ईरान के रक्षा मंत्री जनरल अमीर हातेमी ने कहा कि तेहरान और मास्को को इसलिए अमरीका की ओर से निशाना बनाया जा रहा है कि यह दोनों ताक़तें अमरीका की मांगों को नज़र अंदाज़ करते हुए आपस में सहयोग कर रही हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २६, २०१९ १५:३४ Asia/Kolkata

इस्लामी  गणतंत्र ईरान के रक्षा मंत्री जनरल अमीर हातेमी ने कहा कि तेहरान और मास्को को इसलिए अमरीका की ओर से निशाना बनाया जा रहा है कि यह दोनों ताक़तें अमरीका की मांगों को नज़र अंदाज़ करते हुए आपस में सहयोग कर रही हैं।

जनरल हातेमी ने रशा टुडे को इंटरव्यू देते हुए कहा कि ईरान और रूस ने क्षेत्र की शांति व स्थिरता के लिए तथा विश्व स्तर पर अमरीका के वर्चस्ववाद को चुनौती देते हुए स्वाधीन भूमिका निभाने का फ़ैसला किया है और यही वजह है कि अमरीका इन दोनों देशों पर लगातार प्रहार कर रहा है।

क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समीकरणों में ईरान और रूस की निर्णायक भूमिका है और दोनों को बहुत कारगर घटक के रूप में देखा जाता है। सीरिया में ईरान और रूस के सहयोग का जो अनुभव हुआ उसने राजनैतिक और सुरक्षा क्षेत्रों में बड़ा सार्थक बदलाव किया जिससे अमरीका और उसके घटकों को नुक़सान पहुंचा क्योंकि वह सीरिया में शांति नहीं चाहते थे बल्कि हालात ख़राब करके सीरिया की सरकार को गिरा देने के पक्ष में थे।

अमरीका की नाराज़गी की वजह यह है कि सीरिया के पूरे प्रकरण में अमरीका के हाशिए पर चला गया है। इस देश के संबंध में सारी महत्वपूर्ण वार्ताएं और सहमतियां ईरान तथा रूस की पहल पर और अनेक मामलों में तुर्की के सहयोग से संभव हो पा रही हैं जबकि इस बीच अमरीका का कहीं कोई उल्लेखनीय रोल नज़र नहीं आता। इसकी आलोचना अमरीका के भीतर भी की जा रही है।

जनरल अमीर हातेमी से मुलाक़ात में रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शुइगो ने कहा कि रूस और ईरान का सामरिक सहयोग बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। अमरीका की ट्रम्प सरकार ने दोनों ही देशों पर प्रतिबंध लगा रखे हैं लेकिन दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाख़ारोवा ने कहा कि ईरान के बारे में रूस का स्टैंड बदलने वाला नहीं है और दोनों पक्षों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

यह स्थिति अमरीका और उसके घटकों को पसंद नहीं है इसलिए उनकी तरफ़ से कोशिशें की जा रही हैं और साथ ही झूठी अफ़वाहें भी फैलाई जा रही हैं ताकि ईरान और रूस के बीच बढ़ता सहयोग रुक जाए लेकिन हालात का रुख़ अमरीका और उसके घटकों की मर्ज़ी के अनुरूप नहीं है।