जान बोल्टन की धमकी में कितना दम है?
ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों के बीच अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और युद्धोन्मादी अधिकारी जान बोल्टन ने ईरान के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही की धमकी दी है।
जान बोल्टन ने अपने बयान में कहा कि अमरीका ने कुछ चिंताजनक, उत्तेजक चिन्हों और चेतावनियों जवाब में पश्चिमी एशिया के इलाक़े में अपनी सेंट्रल कमांड में विमान वाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और एक बमबार टास्क फ़ोर्स की तैनाती शुरू कर दी है ताकि ईरान को हर प्रकार के संशय से मुक्त स्पष्ट संदेश दिया जाए कि अमरीका या उसके घटकों के हितों पर हमला हुआ तो भयानक जवाबी कार्यवाही की जाएगी।
जान बोल्टन ने दावा किया कि अमरीका ईरान से युद्ध नहीं चाहता लेकिन ईरानी फ़ोर्सेज़ के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
जान बोल्टन की इन धमकियों का साफ़ मतलब यह है कि अमरीका ईरान को भयभीत करने की कोशिश कर रहा है, बोल्टन इस धारणा में हैं कि धमकियां देकर वह ईरान को रक्षात्मक मुद्रा में पहुंचा देंगे और ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हितों की रक्षा में जो मुखरता दिखा रहा है उसमें कोई ढील कर देगा। जबकि इस्लामी गणतंत्र ईरान बार बार कहता रहा है कि अमरीका या उसके घटकों की ओर से कोई भी हमला हुआ तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
वैसे अमरीका के पूर्व अधिकारी एलेन गोल्डनबर्ग का कहना है कि विमान वाहक पोत और बमबार टास्क फ़ोर्स भेजने का कार्यक्रम काफ़ी पहले का है इसका वर्तमान परिस्थिति से कोई लेना देना नहीं है। जहां तक जान बोल्टन के बयान का सवाल है तो बोल्टन उन उस टीम का हिस्सा हैं जो चाहती है कि ट्रम्प सरकार किसी तरह कोई युद्ध शुरू कर दे। इसे बी-टीम कहा जाता है जिसमें इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू, जान बोल्टन, मुहम्मद बिन सलमान और मुहम्मद बिन ज़ाएद शामिल हैं।
अमरीका ने वर्ष 2017 की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के तहत ईरान को घेरने के लिए स्थानीय एलायंस बनाने की बड़ी कोशिश की ताकि मध्यपूर्व के हालात का रुख़ बदल सके। इस समय सऊदी और इस्राईल एलायंस बना है लेकिन समस्या है कि इस्राईल की हालत फ़िलिस्तीनियों और प्रतिरोधक संगठनों की बढ़ती ताक़त से ख़राब है जबकि सऊदी अरब को इराक़ और सीरिया के बाद यमन में भारी पराजय का मुंह देखना पड़ रहा है। इसलिए यह कहना उचित होगा कि यह समय अमरीका और उसके घटकों की लगातार पराजय का समय है और जान बोल्टन की धमकियों से इस सच्चाई में कोई परिवर्तन होने वाला नहीं है।