जेसीपीओए में ईरान की प्रतिबद्धताओं के संबंध में पोम्पियो की चिंता
अमरीका के मई 2018 में परमाणु समझौते जेसीपीओए से ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से निकलने के बावजूद, अमरीकी अधिकारी ईरान की ओर से जेसीपीओए की प्रतिबद्धताओं के पालन न होने की संभावना जता रहे हैं।
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने सोमवार को स्वीज़रलैंड के बर्न शहर में पत्रकारों के बीच दावा किया कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए की ताज़ा रिपोर्ट से यह चिंता ज़ाहिर होती है कि कहीं ईरान परमाणु समझौते पर पाबंद न रहे।
पोम्पियो ने यह बात ऐसी स्थिति में कही कि शुक्रवार को आईएईए ने अपनी सामयिक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है कि ईरान जेसीपीओए की पाबंदी और इसमें युरेनियम संवर्धन और उसके भंडारण के लिए वर्णित स्तर का पालन कर रहा है।
सवाल यह पैदा होता है कि अगर जेसीपीओए में वर्णित बातों का पालन न होना नकारात्मक क़दम है तो अमरीका अपनी प्रतिबद्धताओं की अनदेखी करते हुए बिना किसी दलील के एकपक्षीय रूप से इस समझौते से क्यों निकल गया? दूसरे शब्दों में अगर वॉशिंग्टन परमाणु समझौते जेसीपीओए को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी रखने का साधन समझता है तो फिर वह इस समझौते से क्यों निकला और साथ ही तेहरान से क्यों चाहता है कि वह इसके प्रति पाबंद रहे?
जैसा कि आईएईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ईरान जेसीपीओए में युरेनियम संवर्धन और उसके भंडारण के संबंध में निर्धारित स्तर का पालन कर रहा है, लेकिन ईरान जल्द ही वह इस सीमा से आगे बढ़ेगा। यह योरोपीय संघ के लिए चेतावनी है कि वह जेसीपीओए में वर्णित अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करे वरना जैसा कि इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने 29 मई को अपने बयान में कहा है कि दबाव का हथकंडा जिसे हाल में इस्तेमाल किया गया है, इसी स्तर पर नहीं रुकेगा बल्कि अगले चरण में ज़रूरी हुआ तो दबाव के दूसरे हथकंडे इस्तेमाल होंगे।
दरअस्ल ट्रम्प सरकार यहां तक कि योरोपियों को लग रहा था कि अमरीका के बढ़ते दबाव के बावजूद तेहरान जेसीपीओए के संबंध में पुनर्विचार नहीं करेगा लेकिन अब अमरीकियों के सामने दूसरी स्थिति पैदा हो गयी है जिसकी वजह से अमरीकी विदेश मंत्री चिंतित हैं। (MAQ/T)