रूस ने की ईरान पर लगे प्रतिबंधों की निंदा
रूस के राष्ट्रपति ने ईरान के विरुद्ध अमरीका के एकपक्षीय प्रतिबंधों को निराधार बताया है।
विलादिमीर पुतीन ने अपने एक साक्षात्कार में कहा है कि अमरीका की ओर से एकपक्षीय रूप में परमाणु समझौते से निकल जाने के बावजूद ईरान आजतक इसके प्रति कटिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर मेरा मानना है कि यह एकपक्षीय प्रतिबंध निराधार हैं। रूसी राष्ट्रपति ने इसी प्रकार फ़ार्स की खाड़ी में बढ़ते तनाव के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया है।
ईरान के विरुद्ध अमरीका के एकपक्षीय प्रतिबंधों को ग़ैरक़ानूनी बताया जाता है। इन प्रतिबंधों का गुट चार धन एक के सदस्यों ने भी खुलकर विरोध किया है। 8 मई 2018 को ट्रम्प की ओर से एकपक्षीय रूप में परमाणु समझौते से निकल जाने के बाद ईरान के विरुद्ध एकपक्षीय रूप में प्रतिबंध लगा दिये गए। यह एकपक्षीय प्रतिबंध सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 2231 के विरुद्ध माने जाते हैं। इन प्रतिबंधों के बाद भी अमरीका ने ईरान के विरुद्ध आर्थिक, वित्तीय, व्यापारिक, ऊर्जा तथा अन्य क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाए। इतना सकबुछ करने के बाद अमरीका अबतक ईरान को अपनी इच्छा के अनुसार मोड़ने में विफल रहा है। ईरान की ओर से बारंबार यह घोषणा की जाती रही है कि वह किसी भी स्थति में दबाव में आकर वार्ता की मेज़ पर नहीं आएगा। तेहरान का यह भी मानना है कि वह कभी भी किसी वर्चस्ववादी शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है।
डोनाल्ड ट्रम्प के शासन काल में अपने विरोधी या प्रतिस्पर्धी देशों पर प्रतिबंध लगाना, वाशिंगटन की विदेश नीति का हिस्सा बन गया है। इन प्रतिबंधों का जारी रहना अब अन्तर्राष्ट्रीय विरोध के रूप में सामने आ रहा है। अमरीका की ओर से प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य, विश्व के कई देशों की सरकारों को केवल ही नहीं बल्कि अपने व्यापारिक प्रतिस्पर्धी देशों की भी कमर तोड़ना है। इस प्रकार से अमरीका, विश्व की अर्थव्यवस्था पर अपना वर्चस्व जमाना चाहता है।
वर्तमान समय में वे सरकारें जो अमरीकी प्रतिबंधों का शिकार हैं वे इन प्रतिबंधों के नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करने के लिए युक्तियां सोच रहे हैं। इसी संदर्भ में रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव निकोला पैतरोशेफ ने ईरान के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसके आधार पर आर्थिक प्रतिबंधों का मुक़ाबला करने के लिए स्थाई अन्तर्राष्ट्रीय आयोग का गठन किया जाए। यह प्रस्ताव ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की उच्च परिषद के सचिव अली शमख़ानी ने दिया है। इन बातों के दृष्टिगत अमरीकी प्रतिबंधों का शिकार सरकारें निकट भविष्य में एक एसे कार्यक्रम को अपनाएंगी जिसके माध्यम से अमरीकी प्रतिबंधों का डटकर मुक़ाबला किया जा सके।