अराक परमाणु संयंत्र को दोबारा खोला जायेगाः राष्ट्रपति रूहानी
ईरान ने यूरोपीय देशों के लिए जो समय सीमा निर्धारित की है वह चार दिन बाद समाप्त होने वाली है।
ईरान ने यूरोपीय देशों को 60 दिन का समय दिया था कि वे परमाणु समझौते में अपने वचनों पर अमल करें। राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी ने बल देकर कहा है कि ईरान परमाणु समझौते में अपनी प्रतिबद्धताओं को कम करने में गम्भीर है।
आठ मई 2019 को ईरान ने अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं को कम करते हुए संवर्द्धित यूरेनियम और भारी पानी की बिक्री को रोक दिया था और साथ ही उसने यूरोपीय देशों को 60 दिन का समय दिया है कि परमाणु समझौते में वे अपने वचनों पर अमल करें।
यह समय जारी महीने की 7 जुलाई को समाप्त हो जायेगा और अगर परमाणु समझौते के पालन में यूरोपीय देशों की ढ़िलाई जारी रहती है तो ईरान पूरी गम्भीरता के साथ अगला कदम उठायेगा।
राष्ट्रपति हसन रूहानी ने बुधवार को कहा कि सात जुलाई से यूरेनियम का संवर्द्धन 3.67 प्रतिशत नहीं रहेगा और इस प्रतिबद्धता को समाप्त कर दिया जायेगा और ईरान को जितनी ज़रूरत होगी वह उस मात्रा में यूरेनियम का संवर्द्धन करेगा।
साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सामने वाले पक्ष निर्धारित समय के अनुसार अपने समस्त वचनों पर अमल नहीं करते हैं तो अराक के परमाणु संयंत्र को दोबारा खोल दिया जायेगा।
ईरान ने एक वर्ष तक धैर्य और सद्भावना से काम लिया और जब उसने देख लिया कि यूरोपीय देश परमाणु समझौतों पर अमल नहीं कर रहे हैं तो उसने परमाणु समझौते के परिप्रेक्ष्य में अपनी प्रतिबद्धताओं को कम करने का फैसला लिया।
परमाणु समझौते के 26वें और 36वें अनुच्छेद के अनुसार परमाणु समझौते के सदस्य देशों को यह अधिकार प्राप्त है कि जब वे यह देखें कि परमाणु समझौते का कोई पक्ष अपने वचनों पर अमल नहीं कर रहा है तो दूसरा पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं को कम कर सकता है।
इस आधार पर ईरान की ओर से अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं को कम करना और संवर्द्धित यूरेनियम की मात्रा को 300 किलो से अधिक करने का अर्थ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं है।
स्पेन के विदेशमंत्री और यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रत्याशी आयुक्त जोसेफ़ बॉरेल के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि ईरान का हालिया कदम परमाणु समझौते का उल्लंघन नहीं है बल्कि वह केवल एक तकनीकी मामला है। MM