ईरानी तेल टैंकर को रोकना समुद्री डकैती हैः विदेशमंत्रालय
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ब्रिटेन की नौसेना ने चार जुलाई को ग़ैर कानूनी तरीके से ईरानी आयल टैंकर (ग्रीस-1") को जबलुत्तारिक स्ट्रैट में रोक लिया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul ०६, २०१९ १५:५१ Asia/Kolkata

ब्रिटेन की नौसेना ने चार जुलाई को ग़ैर कानूनी तरीके से ईरानी आयल टैंकर (ग्रीस-1") को जबलुत्तारिक स्ट्रैट में रोक लिया।

तीन यूरोपीय देशों जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस ने बारमबार ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहने पर बल दिया है।

यही नहीं इन देशों ने ईरान के साथ व्यापारिक लेन- देन के लिए एक वित्तीय व्यवस्था भी बनाये जाने का वादा किया है परंतु आज तक इस संबंध में उनका कोई भी वादा व्यवहारिक नहीं हुआ है दूसरे शब्दों में इन देशों की कथनी और करनी में विरोधाभास है।

इसी संबंध में 5 जुलाई को रूसी विदेशमंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी करके ब्रिटेन द्वारा जबलुत्तारिक स्ट्रैट में ईरान के तेल टैंकर को रोके जाने की निंदा की और इन देशों द्वारा परमाणु समझौते को बाकी रखने हेतु उनके दावों के खिलाफ बताया।

रूसी विदेशमंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में बल देकर कहा है कि लंदन, वाशिंग्टन और दूसरे पश्चिमी देश ईरान के साथ तनावों को कम करने के बजाये स्थिति को जटिल करने का प्रयास कर रहे हैं और जबलुत्तारिक स्ट्रैट में ईरानी तेल टैंकर को इसी लक्ष्य से रोका गया है।

ब्रिटेन की नौसेना ने चार जुलाई को ग़ैर कानूनी तरीके से ईरानी आयल टैंकर (ग्रीस-1") को जबलुत्तारिक स्ट्रैट में रोक लिया।

लंदन का दावा है कि उसने सीरिया के खिलाफ यूरोपीय संघ की सीमा के उल्लंघन को रोकने के लिए यह तेल टैंकर रोका है जबकि स्पेन का दावा है कि लंदन ने अमेरिका के कहने पर ऐसा किया है।

स्पेन के विदेशमंत्रालय के प्रमुख जोसेफ़ बोरेल ने इस बारे में कहा है कि ईरान से चलने वाले तेल टैंकर को अमेरिका के आह्वान पर रोका गया है।

इसी प्रकार स्पेन के विदेशमंत्रालय के प्रमुख जोसेफ़ बोरेल ने कहा है कि अमेरिका का दावा है कि यह तेल टैंकर सीरिया के लिए कच्चा तेल लेकर जा रहा था और ब्रिटेन की नौसेना की यह कार्यवाही समुद्री डकैती है तथा वाशिंग्टन और तेलअविव ने ब्रितानी नौसेना की इस कार्यवाही का समर्थन किया है।

प्रतीत यह हो रहा है कि ब्रिटेन अधिक से अधिक अमेरिकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए ऐसा कर रहा है क्योंकि वह यूरोपीय संघ से निकलने वाला है।

रोचक बात यह है कि सुरक्षा परिषद ने सीरिया पर कच्चे तेल का प्रतिबंध नहीं लगाया है और ब्रिटेन की ओर से सीरिया जाने वाले तेल टैंकर को रोक लेना पूरी तरह ग़ैर कानूनी और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है।

ईरान के विदेशमंत्रालय ने भी ब्रिटेन के इस क़दम को समुद्री डकैती के समान बताया है और कहा है कि ब्रिटेन को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने या यूरोपीय संघ के एक पक्षीय प्रतिबंधों को दूसरे देशों पर थोप दे। विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ज़ोरज़बर दस्ती पर आधारित यह वही अमेरिकी नीति है जिसका सदैव यूरोपीय देश विरोध करते रहे हैं।

बहरहाल ब्रिटेन का यह कदम न केवल परमाणु समझौते की मज़बूती का कारण नहीं बनेगा बल्कि इससे परमाणु समझौते को आघात पहुंचेगा और यह वह बिन्दु है जिसकी ओर रूस ने ध्यान दिया है। MM