वियना में निदेशक मंडल की बैठक एक मज़ाक हैः काज़िम ग़रीबाबादी
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वियना में निदेशक मंडल की बैठक ने दर्शा दिया कि अमेरिका अपने हितों के आधार पर अब भी एक पक्षीय ढंग से अपनी नीति को आगे बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul ११, २०१९ १४:३८ Asia/Kolkata

वियना में निदेशक मंडल की बैठक ने दर्शा दिया कि अमेरिका अपने हितों के आधार पर अब भी एक पक्षीय ढंग से अपनी नीति को आगे बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर रहा है।

एक ओर तेहरान में फ्रांस के राष्ट्रपति के कूटनयिक सलाहकार ने ईरानी अधिकारियों से विचार- विमर्श किया तो दूसरी ओर अमेरिका के आह्वान पर वियना में निदेशक मंडल की बैठक हुई।

ईरान ने जब से अपनी परमाणु प्रतिबद्धता को कम करने की नीति पर अमल शुरू कर दिया है तब से यूरोप ने नये सिरे से प्रयास आरंभ कर दिया है और अमेरिका इस मामले को लेकर असमंजस का शिकार है कि क्या करे।

यह जो स्थिति पैदा हुई है वह परमाणु समझौते के संबंध में ईरान की तार्किक नीति की सूचक है।

फ्रांस के राष्ट्रपति के सलाहकार एमानोएल बॉन ने तेहरान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अली शमख़ानी, विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ और राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी से भेंटवार्ता की।

इस भेंटवार्ता में राष्ट्रपति ने कहा कि परमाणु समझौते में जिन बातों का उल्लेख किया गया है समस्त पक्षों को उसका पालन करना चाहिये और अगर दोनों पक्ष परमाणु समझौते पर अमल करें तो ईरान परमाणु प्रतिबद्धताओं को कम करने का अपना अगला कदम नहीं उठायेगा।

एक ओर फ्रांस के राष्ट्रपति ने तेहरान में विचार- विमर्श किया तो दूसरी ओर वियना में अमेरिकी आह्वान पर निदेशक मंडल की बैठक हुई। इस बैठक में अमेरिकी राजदूत ने एक बार फिर ईरान के विरुद्ध वाशिंग्टन के दावे को दोहराया और ईरान पर परमाणु समझौते के उल्लंघन का आरोप मढ़ा।

वियना में निदेशक मंडल की बैठक ने दर्शा दिया कि अमेरिका अपने हितों के आधार पर अब भी एक पक्षीय ढंग से अपनी नीति को आगे बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर रहा है।

रोचक बात यह है कि वियना बैठक ऐसी स्थिति में हुई जब अमेरिका ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते में नहीं है किन्तु वह इस बात का आह्वान कर रहा है कि पूरी तरह परमाणु समझौते का पालन किया जाना चाहिये क्या इससे स्पष्ट दोहरेपन का उदाहरण हो सकता है?

स्वयं एकपक्षीय रूप से अमेरिका परमाणु समझौते से निकल चुका है और वह धमकी देता है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 पर अमल करने वाले देशों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।

जो देश सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर न केवल अमल नहीं कर रहा है बल्कि अमल करने वाले देशों के विरुद्ध कार्यवाही की धमकी देता है तो उससे इस प्रकार के दोहरे मापदंड के अलावा किसी प्रकार की आशा नहीं रखी जा सकती।

वियना में ईरानी राजदूत क़ाज़िम ग़रीबाबादी के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने अमेरिकी आह्वान पर निदेशक मंडल की बैठक और अमेरिका के दोहरे मापदंड को मज़ाक की संज्ञा दी है। MM