ईरान की मीज़ाइल शक्ति और अमरीका की निराधार कल्पनाएं
एक अमरीकी टीवी चैनल से ईरान के विदेश मंत्री का इंटरव्यू और ईरान की मीज़ाइल शक्ति के बारे में पूछे गए सवाल पर ज़रीफ़ के जवाब पर अमरीका के राष्ट्रपति और विदेशमंत्री ने तुरंत प्रतिक्रिया जताई है।
विदेश मंत्री ज़रीफ़ ने अमरीका के एनबीसी टीवी से बात करते हुए ईरान की मीज़ाइल क्षमता के बारे में वार्ता के लिए वाॅशिंग्टन के आग्रह के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि अगर अमरीका चाहता है कि मीज़ाइलों के बारे में बात करे तो उसे पहले क्षेत्र में हथियार बेचना बंद करना होगा। अमरीकी समाचार एजेंसी एसोशिएटेड प्रेस ने इस पर जो रिपोर्ट दी उसमें लिखा कि ईरान के विदेश मंत्री ने एनबीसी से बात करते हुए ईरान की मीज़ाइल शक्ति के बारे में वार्ता के लिए तेहरान की तैयारी की घोषणा कर दी है।
इस दावे और ज़रीफ़ के बयान में फेरबदल के बाद अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने जो, व्यवहारिक रूप से मानसिक युद्ध और आंतरिक स्तर पर मतभेद फैलाने के माध्यम से इस्लामी गणतंत्र ईरान को कमज़ोर बनाना चाहते हैं, इसे अपने लिए एक उपलब्धि बताया। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की समस्या के बारे में बहुत अधिक प्रगति हुई है। सच्चाई यह है कि ईरान की मीज़ाइल और प्रतिरक्षा क्षमता के बारे में वार्ता का विषय ईरान में हर स्तर पर रेड लाइन घोषित किया जा चुका है। ईरान में सत्ता के हर स्तर पर बार बार बल देकर कहा गया है कि तेहरान, मीज़ाइल शक्ति समेत अपनी शक्ति के कारकों के बारे में किसी भी देश से बात नहीं करेगा। संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के प्रतिनिधि कार्यालय ने कुछ समाचार एजेंसियों के इस दावे पर प्रतिक्रिया स्वरूप एक बयान में कहा कि ईरान की मीज़ाइल और प्रतिरक्षा क्षमता, पर किसी भी प्रकार की कोई वार्ता नहीं हो सकती।
मीज़ाइल शक्ति और पश्चिमी एशिया में ईरान की सशक्त व प्रभावी उपस्थिति दो ऐसे विषय हैं जिन्हें ट्रम्प सरकार हर हथकंडे का प्रयोग करके ख़त्म करना चाहती है। ये दोनों शक्तियां ईरान के प्रतिरोध और आत्मविश्वास का परिणाम हैं। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई के शब्दों में ईरान की गौरवपूर्ण प्रतिरक्षा क्षमता, पवित्र प्रतिरक्षा काल के दौरान दबावों और विदेशियों की ओर से मुंह मोड़ लेने का परिणाम है। (HN)