क्षेत्र में हिंसा व चरमपंथ की जड़ इस्राईल हैः रूहानी
राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने इस्लामी देशों के मध्य संबंधों को मजब़ूत करने को ईरान की प्राथिमकता बताया है।
डाक्टर हसन रूहानी ने बृहस्पतिवार को इस्तांबोल में इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी की 13वीं बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आज इस संगठन के सदस्य शांति और न्याय के लिए एकता व एकजुटता के नारे के साथ इस्तांबोल में एकत्रित हुए हैं, विश्व में मुसलमानों के संयुक्त भविष्य के बारे में चिंतन मनन का बेहतरीन अवसर है।
राष्ट्रपति रूहानी ने इस बात पर बल देते हुए कि इस्लामी सहयोग संगठन में मतभेद फैलाने की किसी भी कार्यवाही का महत्व नहीं है, कहा कि इस्लामी जगत में मतभेद, सभी की समस्या है और मतभेदों तथा भ्रांतियों का समाधान केवल कूटनयिक रास्ते और शांतिपूर्ण वार्ता द्वारा ही संभव है।
राष्ट्रपति रूहानी ने इस्लामी जगत में धर्मों के मध्य मतभेद फैलाने और चरमपंथ को हवा देने की ओर संकेत करते हुए बल दिया कि इस्लामी सभ्यता का पतन उस समय आरंभ हुआ जब बड़ी इस्लामी शक्तियां आपसी सहयोग के बजाए एक दूसरे से परिणामहीन झगड़ों में उलझ गयीं और उन्होंने विदेशी आक्रमण की भूमिका प्रशस्त की।
राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कुछ देशों की ओर से इस्लाम को हिंसक और अपराधी बताने के उद्देश्य से इस्लाम विरोधी गुटों की वित्तीय व सामरिक सहायताओं पर खेद प्रकट करते हुए कहा कि इस्लामी देशों को चाहिए कि इस्लामी देशों को चाहिए कि इस्लाम के नाम पर शांति और हिंसा के मुक़ाबले के लिए वैश्विक गठबंन में अग्रणी रहें और क्षेत्र व दुनिया के सारे इंसानों के लिए स्थाई शांति और उनके समस्त अधिकारों को वापस दिलाएं।
राष्ट्रपति रूहानी ने ज़ायोनी शासन को हिंसा और चरमंपथ की जड़ बताते हुए कहा कि फ़िलिस्तीनी जनता का जनसंहार और गज़्ज़ा के परिवेष्टन का जारी रहना, ज़ायोनी शासन की हिंसक प्रवृत्ति का चिन्ह है। उन्होंने कहा कि खेद की बात यह है कि विश्व समुदाय विशेषकर पश्चिमी शक्तियों की निश्चेतना के कारण यह शासन अपनी पाश्विकता जारी रखे हुए है।
डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि अतिक्रमण, धमकियों, अतिग्रहण और आतंकवाद के मुक़ाबले में ईरान, सदैव ही इस्लामी देशों और मुसलमानों का समर्थक रहा है और रहेगा। (AK)