ईरान के विरुद्ध अमरीका के नए प्रतिबंध
अमरीका ने ईरान के पांच लोगों और सात कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।
अमरीका की ओर से ईरान के विरुद्ध प्रतिबंधों का सिलिसला लगातार जारी है। गुरुवार को अमरीका के वित्तमंत्रालय ने एक घोषणापत्र जारी करके ईरान के पांच लोगों और सात कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाने की सूचना दी है। अमरीका ने इनपर ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम से संबन्ध का आरोप लगाया है। अमरीकी वित्तमंत्रालय ने इस बयान में दावा किया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए संवेदनशील उपकरण उपलब्ध कराने में प्रतिबंधित लोगों और कंपनियों की भूमिका रही है। इस बयान के अनुसार जिन पांच लोगों को प्रतिबंधित किया गया है वे सभी ईरानी नागरिक हैं। जिन सात कंपनियों को प्रतिबंधों का लक्ष्य बनाया गया है उनमें से दो ईरानी, चार चीनी और एक बेल्जियम की है।
ट्रम्प द्वारा एकपक्षीय रूप से परमाणु समझौते से निकल जाने के बाद से ईरान के विरुद्ध दो चरणों अर्थात अगस्त और नवंबर 2018 में प्रतिबंध लागू किये गए हैं। यह सारे ही अमरीकी प्रतिबंध अन्तर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 2231 के विरुद्ध हैं। ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के मार्ग में बाधाएं डालने और इस कार्यक्रम को पूर्ण रूप से रुकवाने के उद्देश्य से अमरीका ने प्रतिबंधों का सहारा ले रखा है। अब ट्रम्प प्रशासन बलपूर्वक ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की कोशश कर रहा है। इस मामले में वह विश्वसनीय अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं को भी अनेदखा किये हुए है। परमाणु मामले की निगरानी करने वाली अन्तर्राष्ट्रीय संस्था आईएईए की बातों को भी ट्रम्प पूरी तरह से अनदेखा किये जा रहे हैं। आईएईए अपनी 15 रिपोर्टों में इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि ईरान की परमाणु गतिविधियां पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण हैं जबकि अमरीकी अधिकारी इसके विपरीत दावे कर रहे हैं। अवैध ज़ायोनी शासन की इच्छाओं की पूर्ति करते हुए अमरीका का प्रयास है कि वह ईरान को हर प्रकार की शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों से वंचित कर दे। यहां तक कि उसका मानना है कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन का भी अधिकार नहीं होना चाहिए।
जेसीपीओए या परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से निकलने के बाद से अमरीका ने विभिन्न बहानों से ईरान के विरुद्ध प्रतिबंधों का क्रम जारी कर रखा है। इन प्रतिबंधों से वाशिग्टन का उद्देश्य, अमरीका के दृष्टिगत समझौता करने के लिए ईरान को वार्ता की मेज़ पर लाने के लिए विवश करना है जिसमें परमाणु मामले के साथ ही साथ ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और मध्यपूर्व के बारे में ईरान की नीतियों को भी शामिल करना है। अमरीका की ओर से ईरान के विरुद्ध अभूतपूर्व प्रतिबंधों के बावजूद तेहरान, बारंबार यह कह चुका है कि वह उस देश के साथ किसी भी स्थिति में वार्ता करने के लिए तैयार नही है जिसने जानबूझकर अन्तर्राष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन किया है।