यूरोप, ईरान के साथ अच्छी और बुरी पुलिस का खेल
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फ़्रांस के राष्ट्रपति ने अपने ईरानी समकक्ष से जो टेलीफ़ोनी संपर्क किया उसके बारे में कहा जा रहा है कि वह परमाणु समझौते में बाक़ी रहने के लिए ईरान को कुछ सुझाव लिए हुए था। इस टेलीफ़ोनी संपर्क के कारण अमरीकी राष्ट्रपति कुछ नाराज़ हुए और उन्होंने ट्वीटर पर मैक्रां पर अपना ग़ुस्सा निकाल दिया और दावा किया कि वाशिंग्टन से वार्ता के लिए तेहरान बहुत ही उत्सुक है।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Aug १३, २०१९ १४:२५ Asia/Kolkata
  • यूरोप, ईरान के साथ अच्छी और बुरी पुलिस का खेल

फ़्रांस के राष्ट्रपति ने अपने ईरानी समकक्ष से जो टेलीफ़ोनी संपर्क किया उसके बारे में कहा जा रहा है कि वह परमाणु समझौते में बाक़ी रहने के लिए ईरान को कुछ सुझाव लिए हुए था। इस टेलीफ़ोनी संपर्क के कारण अमरीकी राष्ट्रपति कुछ नाराज़ हुए और उन्होंने ट्वीटर पर मैक्रां पर अपना ग़ुस्सा निकाल दिया और दावा किया कि वाशिंग्टन से वार्ता के लिए तेहरान बहुत ही उत्सुक है।

हम अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प और सरकार में उनके समर्थकों को जवाब देना नहीं चाहते क्योंकि झूठ बोलने में इनकी कोई मिसाल नहीं है बल्कि हम यूरोप के बारे में उनकी सच्चाई और यूरोप से किए गये वचनों पर नज़र डालते हैं।

एक साल पहले अमरीका परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से निकल गया था और उसने ईरान के विरुद्ध पुराने प्रतिबंध लौटाने शुरु कर दिए। इसके मुक़ाबले में पमाणु समझौते में बाक़ी बचे तत्वों ने इसकी रक्षा के लिए क्या किया?

कुछ भी नहीं, केवल खोखले वादे करने के अलावा कुछ भी नहीं किया, खोखले वादे से किसी का आजतक भला हुआ है? इसकी सबसे बेहतरीन दलील इन्सटैंक योजना है जिसके बारे में बातें हो रही हैं, यह योजना भी केवल काग़ज़ पर ही व्यवहारिक हो पायी है।

मामला उन स्वतंत्र यूरोपीय कंपनियों के समर्थन का है जो ईरान के साथ संबंधों की इच्छुक हैं। यह मुद्दा भी लटका हुआ है। यही कारण है कि ईरान ने एक समय देकर यूरोप को धमकी दी है कि यदि यूरोप ने अपने वचनों पर अमल नहीं किया तो वह परमाणु समझौते में वर्णित अपने वचनों में कमी करेगा और यह क्रम जारी रहेगा।

दूसरा विषय जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती वह यह है कि उसने हमेशा सामने वाले पक्ष को वार्ता का निमंत्रण दिया है ताकि क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे और समस्याएं हल हो सके क्योंकि ईरान ने हमेशा वार्ता को समस्याओं के निवारण का सबसे अच्छा और सबसे ख़र्चीला रास्ता समझा है किन्तु बात यह है कि अमरीका क्यों वार्ता के लिए तैयार नहीं होता?

इसका जवाब स्पष्ट है। ईरान एक स्वतंत्र सरकार है जो अपने अटल मूल्यों के आधार फ़ैसले लेती है, इन्हीं मूल्यों मे से एक विदेशियों की ओर से थोपी गयी बातों को नकारना और किसी को भी अपने हितों से खिलवाड़ न करने देना ताकि अमरीका, दूसरे अरब देशों की तरह ईरान को भी दुधारू गाय समझकर दुहना न शुरु कर दे।

यदि मनोवैज्ञानिक युद्ध जो हालिया दिनों में शुरु हुआ है, वह रक्तरंजित युद्ध का रूप धारण कर ले ताकि ईरान को तबाह कर सकें, इस बारे में कहना चाहिए कि अमरीका न केवल यह नहीं चाहता बल्कि यूं कहा जाए कि उसमें ईरान से लड़ने का साहस नहीं है। इसका एक कारण ईरान की रक्षा शक्ति है जो दुनिया में किसी को भी अपनी धरती को ओर तिरछी नज़र से देखने नहीं देगा।

इन सब बातों से यह परिणाम निकाला जा सकता है कि अमरीका यह पुराना खेल है अर्थात अच्छी पुलिस, बुरी पुलिस है। अमरीका का काम दूसरों को डराना और धमकाना है, यूरोप का काम, काम अधर में लटकाना और समय बर्बाद करना है। अब यह बात स्पष्ट हो गयी कि यह खेल अब ईरान को धोखा नहीं दे सकते और इसका सबूत उनको मिल चुका है। (AK)