ईरानी तेल टैंकर की रिहाई और अमरीका की फ़ज़ीहत
अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने जिब्रालटर में ईरान के तेल टैंकर की रिहाई को अत्यंत खेदजनक बताया है।
ईरान का यह तेल टैंकर, जिसे चार जुलाई को जिब्रालटर के पास रोक दिया गया था, रविवार को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र की ओर रवाना हो गया। अमरीका ने इसे रुकवाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह इसमें पूरी तरह विफल रहा। अमरीका के एक न्यायालय ने तेल की तस्करी और आईआरजीसी द्वारा इसकी आय से लाभ उठाने जैसे निराधार आरोप लगा कर ईरान के इस तेल टैंकर को रोकने का आदेश दिया लेकिन जिब्रालटर के अधिकारियों ने अमरीका की यह मांग रद्द कर दी।
अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने फ़ाॅक्स न्यूज़ से बात करते हुए ईरान के तेल टैंकर को रिहा करने के जिब्रालटर के फ़ैसले को बहुत दुखद बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें आशा है कि इस तेल टैंकर को पुनः रोका जाएगा। बताया जा रहा है कि अमरीका अब किसी अन्य देश के माध्यम से ईरान के इस तेल टैंकर को, जिसका नया नाम आदरियान दरिया है, रोकने की हर संभव कोशिश कर रहा है लेकिन तेहरान ने स्पष्ट रूप से सचेत कर दिया है कि इस प्रकार की किसी भी संभावित कार्यवाही का बहुत बुरा परिणाम होगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसवी ने कहा कि तेहरान ने औपचारिक चैनलों से अमरीकी अधिकारियों को आवश्यक चेतावनियां दे दी हैं ताकि वे इस प्रकार की ग़लती न कर बैठें क्योंकि अमरीका के लिए इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। उन्होंने कहा कि ईरानी तेल टैंकर को छोड़ने का जिब्रालटर का फ़ैसला अमरीका के एकपक्षवाद पर गहरा आघात था।
ईरानी तेल टैंकर को रोके जाने के बाद ईरान व ब्रिटेन के बीच गहरा कूटनैतिक संकट उत्पन्न हो गया। इसके लगभग दो हफ़्ते बाद ईरान ने ब्रिटेन के एक तेल टैंकर स्टेना एम्पेरो को हुर्मुज़ स्ट्रेट में रोक लिया जिसके बाद ब्रिटेन बचाव की मुद्रा में आ गया। बहर हाल अमरीका ने जिब्रालटर से ईरान के तेल टैंकर को रोकने की मांग करके अपनी बड़ी फ़ज़ीहत कराई है और उसकी अंतर्राष्ट्रीय साख बुरी तरह प्रभावित हुई है क्योंकि अगर अमरीकी अदालत के इस आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो उसकी रही सही साख भी ख़त्म हो जाएगी। वाॅशिंग्टन ने अब तक यह नहीं बताया है कि वह आगे क्या करने जा रहा है लेकिन अधिकतर टीकाकारों का कहना है कि वाॅशिंग्टन इस बात का अनुमान लगा रहा है कि अगर उसने ईरान के तेल टैंकर को रोका तो उसे इसकी कितनी क़ीमत चुकानी पड़ेगी। रशा टूडे ने अपनी एक समीक्षा में लिखा है कि भूमध्य सागर में तैनात अमरीकी सैनिक आदरियान दरिया को रोकने की क्षमता रखते हैं लेकिन इस तेल टैंकर को रोकने के अगले ही दिन, अमरीका को जिन नकारात्मक परिणामों का सामना करना पड़ेगा, उसके लिए राजनैतिक, आर्थिक व सामरिक स्तर पर एक ठोस फ़ैसला किए जाने की ज़रूरत है।
"ट्रुथ डिग" वेबसाइट ने वाइट हाउस के युद्धप्रेमियों पर एक और प्रहार शीर्षक के अंतर्गत अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि ईरानी तेल टैंकर को छोड़े जाने की घटना ने दिखा दिया है कि ट्रम्प और वाइट हाउस के युद्धप्रेमी, न केवल यूरोप में अपने अहम घटकों के बीच अमरीका की साख को बेहतर बनाने में नाकाम रहे हैं बल्कि उन्हें अमरीका के सुपर पाॅवर के स्थान को भी इतना गिरा दिया है कि अब यूरोप की छोटी छोटी अदालतें भी बड़ी आसानी से अमरीका की अनदेखी कर देती हैं और वाॅशिंग्टन की मांगों को ठेंगा दिखा देती हैं। एक टीकाकार ने तो रशा टूडे से बात करते हुए यहां तक कह दिया कि सारा मामला ख़त्म हो चुका है और अब अमरीकी इस तेल टैंकर को नहीं रोक सकते क्योंकि उन्हें ईरान की कड़ी व उग्र प्रतिक्रिया का सामना पड़ेगा और संभव है कि बात परोक्ष वार्ता से निकल कर सीधे टकराव के चरण में पहुंच जाए और ऐसा नहीं लगता कि वाॅशिंग्टन इसका इच्छुक होगा।
कुल मिला कर ऐसा प्रतीत होता है कि इस फ़ज़ीहत के बाद अमरीकी अधिकारी एक ऐसी सरकार के भेस में प्रकट होना चाहते हैं जो अब भी ताक़तवर है और उसे राजनैतिक सफलता मिली है। उदाहरण स्वरूप ईरान के तेल टैंकर के यूनान की ओर जाने की ख़बर पर प्रतिक्रिया जताते हुए अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अमरीका ने इस तेल टैंकर के बारे में अपने कड़े रुख़ से यूनान की सरकार को अवगत करा दिया है। वास्तविकता यह है कि अब अमरीका के लिए अन्य देशों पर अपनी मांगों को थोपना बहुत कठिन होता जा रहा है जिसका सीधा अर्थ यही है कि अब महाशक्ति का उपनाम उससे छिन चुका है। (HN)