जानिये बीसवीं सदी के लज्जाजनक घोषणापत्र "बालफ़ोर घोषणापत्र" के बारे में
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ईरानी छात्रों ने शुक्रवार को बीसवीं सदी के सबसे ज़्यादा लज्जानक घोषणापत्रों में से एक "बालफ़ोर घोषणापत्र" के पारित होने के वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, तेहरान स्थित ब्रितानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया। इसी तरह छात्रों ने फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के ख़िलाफ़ ब्रिटेन की नीतियों की निंदा की।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov ०२, २०१९ ०९:२९ Asia/Kolkata
  • जानिये बीसवीं सदी के लज्जाजनक घोषणापत्र

ईरानी छात्रों ने शुक्रवार को बीसवीं सदी के सबसे ज़्यादा लज्जानक घोषणापत्रों में से एक "बालफ़ोर घोषणापत्र" के पारित होने के वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, तेहरान स्थित ब्रितानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया। इसी तरह छात्रों ने फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के ख़िलाफ़ ब्रिटेन की नीतियों की निंदा की।

समाचार एजेंसी फ़ार्स के मुताबिक़, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने फ़िलिस्तीन का ध्वज फहराया। इसी तरह छात्रों ने ब्रिटेन सरकार की नीतियों और ज़ायोनी शासन के अपराध की निंदा में नारे लगाए।

"बालफ़ोर घोषणापत्र" ब्रिटेन के इतिहास का सबसे लज्जाजनक घोषणापत्र समझा जाता है जिससे फ़िलिस्तीन पर ज़ायोनियों के अवैध क़ब्ज़े और इस्राईल को अवैध वजूद देने का रास्ता साफ़ हुआ।

यह घोषणापत्र तत्कालीन ब्रितानी विदेश मंत्री आर्थर जेम्ज़ बालफ़ोर ने 2 नवंबर 1917 को यहूदी संप्रदाय के नेता बैरन रॉथचाइल्ड के नाम पारित किया था। इस घोषणापत्र में फ़िलिस्तीन की भूमि पर अवैध इस्राईल के वजूद को क़ायम करने की इजाज़त दी गयी।

यह घोषणापत्र फ़िलिस्तीन की पीड़ित जनता की बहुत सी यातना का कारण बना। (MAQ/N)