जर्मन विदेश मंत्री का ईरानी जनता के समर्थन में दावा कितना सच्चा?
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसवी ने देश की हालिया घटनाओं व अशांति से राजनैतिक फ़ायदा उठाने की जर्मन विदेश मंत्री की कोशिश की निंदा की।
जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास ने इस देश की संसद में दावा किया कि ईरान में हालिया प्रदर्शनों के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए इसलिए इन घटनाओं के हिंसक दमन की निंदा होनी चाहिए।
इससे पहले योरोपीय संघ के विदेश नीति प्रभारी जोज़फ़ बोरल ने भी ईरान के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करते हुए हालिया अशांति से फ़ायदा उठाने की कोशिश की और ईरान पर इल्ज़ाम लगाए।
योरोपीय अधिकारी ऐसी हालत में ईरानी जनता का समर्थन करने की बात कर रहे हैं कि ये योरोपीय देश हैं जिन्होंने ईरानी जनता के ख़िलाफ़ अमरीका की आर्थिक आतंकवाद की नीति का साथ देकर व्यवहारिक रूप से मानवाधिकार का उल्लंघन किया है। ये कोई नई बात नहीं हैं। योरोपीय देशों के दोहरे मापदंड पर आधारित दृष्टिकोण का इतिहास पुराना है। इस्लामी क्रान्ति के इतिहास को पढ़ने से पता चलता है कि ईरान के ख़िलाफ़ इराक़ के बासी सद्दाम शासन द्वारा थोपी गयी जंग के वक़्त जर्मनी वह देश था जिसने इराक़ी शासन को जनसंहारक केमिकल हथियार दिए थे।
इसके अलावा जर्मनी सहित कुछ योरोपीय देशों द्वारा पश्चिमी एशियाई देशों में हथियार भेजा जाना कि जिसके नतीजे में यमन सहित अनेक देशों में निहत्थे व बेगुनाह बच्चों और औरतों का जनसंहार, तबाही और युद्ध अपराध हो रहे हैं, पश्चिमी देशों की मानवाधिकार की परिभाषा का एक नमूना है।
मानवाधिकार के उल्लंघन की इन मिसालों के मद्देनज़र, उम्मीद है जर्मनी सहित योरोपीय देशों की सरकारें दोहरे मापदंड पर आधारित दृष्टिकोण अपनाने के बजाए मानवाधिकार के मूल उसूल निष्पक्षता और तथ्य की समझ जैसे उसूल को मद्देनज़र रखेंगी।
ईरान सरकार ने पेट्रोल की क़ीमत बढ़ने के बाद पैदा हुयी अशांति व विरोध प्रदर्शन के दौरान जनता की वास्तविक आवाज़ को सुना और वह उप्रदवियों को, जनता के हित में वास्तविक प्रदर्शन करने वालों से अलग समझती है।
इसी संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसवी ने गुरुवार को कहा कि ईरान सरकार हालिया अशांति में दुश्मनों, बेगुनाह लोगों के हत्यारों और उनके समर्थकों को, प्रदर्शनकारियों के दृष्टिकोण से अलग समझती है और जांच के नतीजे सामने आने के बाद, जनता के अधिकार के सम्मान में ज़रूरी फ़ैसला लेगी।
ईरान में पेट्रोल की क़ीमत बढ़ने के बाद शुरु हुयी अशांति के दौरान अमरीका और योरोपीय देशों के दृष्टकोण से ज़ाहिर हो गया कि वे प्रदर्शन की लहर पर सवार होकर अपने राजनैतिक हित साधना चाहते हैं और उनकी ओर से मानविधकार का पालन तथा ईरानी जनता के अधिकार का समर्थन किए जाने पर आधारित बयान, घड़ियाली आंसू की तरह हैं। (MAQ/T)