ईरान मध्यपूर्व में जारी एक बड़ी जंग कैसे जीत रहा है?
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मध्यपूर्व में एक बड़ी जंग जारी है, और ईरान पहले से ही इस जंग को जीतने की राह पर आगे बढ़ रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan १६, २०२० ०६:४८ Asia/Kolkata
  • ईरान मध्यपूर्व में जारी एक बड़ी जंग कैसे जीत रहा है?

मध्यपूर्व में एक बड़ी जंग जारी है, और ईरान पहले से ही इस जंग को जीतने की राह पर आगे बढ़ रहा है।

जून में अमरीकी आधुनिक ड्रोन ग्लोबल हॉक को मार गिराए जाने, सितंबर में सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर आश्चर्यजनक हमले और पिछले हफ़्ते इराक़ में अमरीकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले तथा जवाबी कार्यवाही तो दूर वाशिंगटन का इन मिसाइलों को लक्ष्य पर लगने से नहीं रोक पाना, इस बात का स्पष्ट सुबूत है कि तेहरान इस जंग में कैसे अमरीका और उसके सहयोगियों पर एक के बाद दूसरी रणनीतिक जीत हासिल कर रहा है।

ईरान और उसके सहयोगियों के लंबी दूरी के सटीक गाइडेड मिसाइल और स्मार्ट हथियार देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों को नष्ट कर सकते हैं।

इस बड़ी जंग में ईरान की जीत के तीन मुख्य कारण हैं: ईरान के आधुनिक हथियार, अपने दुश्मनों को घेरने के लिए प्रतिरोधी गुट और इन दुश्मनों के पास रणनीतिक गहराई की कमी।

यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि ईरान यह सब कड़े प्रतिबंधों, कम रक्षा बजट और बग़ैर परमाणु हथियारों के हासिल कर रहा है। तेहरान अपने बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन विमानों की सटीकता के बल पर आक्रामक रुख़ अपनाए हुए है।

हिज़्बुल्लाह, सीरिया, इराक़ी स्वयं सेवी बलों और यमन के हौसी आंदोलन को भी तेहरान यह तकनीक उपलब्ध करवा रहा है।  

ईरान की इस रणनीति को इस्राईली आग का घेरा बता रहे हैं, जिसके तहत वह 360 गिग्री पर वह क्षेत्र में किसी भी टारगेट को नष्ट कर सकता है। ख़ास तौर से अमरीकी सैन्य ठिकानों को ईरान किसी भी समुद्री तट से ध्वस्त कर सकता है।

तेहरान ने अपने दुश्मनों को चारो ओर से घेर रखा है और कब किस दिशा से या एक साथ सभी दिशाओं से दुश्मन पर हमलावर होना है, इसका चयन उसे करना है।

इस समय मध्य पूर्व में क़रीब 60,000 अमरीकी सैनिक तैनात हैं। अमरीका के सभी सैनिक, फ़ार्स खाड़ी में उसके वायु और नौसैन्य ठिकाने तथा युद्धपोत ईरान की पहुंच में हैं।

इसमें कोई शक नहीं है कि इस्राईल, ईरान के ख़िलाफ़, बहुत अधिक सक्रिय है। लेकिन हिजबुल्लाह ज़ायोनी शासन को किसी भी कार्यवाही की स्वतंत्रता से रोक रखा है। उसे ग़ज्ज़ा के अपने उत्तरी मोर्चे से नियमित रूप से आग उगलने वाले रॉकेटों को सहन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

8 जनवरी को इराक़ में अमरीकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों के बाद ईरानी अधिकारियों ने एलान किया था कि जनरल सुलेमानी की हत्या का बदला अभी पूरा नहीं हुआ है, इस्राईली और अमरीकी अधिकारियों ने भी चेतावनी दी है कि तेहरान अभी और हमले कर सकता है। msm