ईरान ने यूरोपीय संघ की वादे पूरे न करने पर आलोचना की
https://parstoday.ir/hi/news/iran-i84370-ईरान_ने_यूरोपीय_संघ_की_वादे_पूरे_न_करने_पर_आलोचना_की
इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद यूरोपीय संघ अपने किए गये वचनों से संबंधित प्रभावी कार्यवाही नहीं कर सका।
(last modified 2023-11-29T09:15:15+00:00 )
Feb २३, २०२० ०६:३७ Asia/Kolkata
  • ईरान ने यूरोपीय संघ की वादे पूरे न करने पर आलोचना की

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद यूरोपीय संघ अपने किए गये वचनों से संबंधित प्रभावी कार्यवाही नहीं कर सका।

राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने शनिवार को ईरान के दौरे पर आए हालैंड के विदेशमंत्री स्टीफ़ ब्लोक से होने वाली मुलाक़ात में ईरान के परमाणु समझौते को क्षेत्र और दुनिया के हित में क़रार दिया और कहा कि इस समझौते से अमरीका के अलग होने से क्षेत्र और दुनिया के अतिरिक्त अमरीका को नुक़सान पहुंचेगा।

उन्होंने परमाणु समझौते की रक्षा पर बल देते हुए कहा कि हमने इस हवाले से यूरोपीय संघ से वार्ता के मार्गों को बंद नहीं किया है।

राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने ईरान विरोधी अमरीका के ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंधों की ओर संकेत करते हुए कहा कि अमरीका के अत्याचारपूर्ण प्रतिबंध, खाद्य पदार्थों और दवाओं को भी शामिल किए हैं और दुनिया के स्वतंत्र राष्ट्रों से अपेक्षा है कि वह एक होकर इन अत्याचारपूर्ण प्रतिबंधों की निंदा करें।

राष्ट्रपति रूहानी ने क्षेत्र में अशांति की जड़ को अमरीका की उपस्थिति क़रार देते हुए कहा कि यदि अमरीका हस्तक्षेप करने और आतंकवादी कार्यवाहियों से बाज़ आ जाए तो पश्चिमी एशिया में शांति स्थापित हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय देशों द्वारा ही पूरी हो सकती है और फ़ार्स की खाड़ी में विदेशी सैन्य उपस्थिति, क्षेत्र की सुरक्षा के लिए हानिकारक है।

इस अवसर पर हालैंड के विदेशमंत्री स्टीफ़ ब्लोक ने परमाणु समझौते की रक्षा पर बल देते हुए कहा कि हमने बारम्बार अमरीकी अधिकारियों से कहा है कि परमाणु समझौते से अलग होना सही क़दम नहीं है।

स्टीफ़ ब्लोक ने इस बात की ओर संकेत करते हुए कि उनका देश परमाणु समझौते की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार के प्रयास से संकोच नहीं करेगा, इस अभियान की प्राप्ति के लिए आपसी सहमति और वार्ता के क्रम को जारी रखने पर बल दिया। (AK)