प्रतिबंध, कोरोना वायरस का पाँचवाँ स्तंभ हैः ईरान
संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के प्रतिनिधि कार्यालय ने प्रतिबंधों को कोरोना वायरस का पाँचवाँ स्तंभ बताते हुए कहा है कि संकट से संघर्ष में किसी भी राष्ट्र की क्षमता को सीमित करने वाला हर क़दम, इस बीमारी के फैलाव और इससे वैश्विक संघर्ष को कमज़ोर करने का कारण बनेगा।
राष्ट्र संघ में ईरान के प्रतिनिधि कार्यालय ने एक रिपोर्ट जारी करके कोरोना वायरस से मुक़ाबले के लिए सभी देशों की कोशिशों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा है कि ऐसे समय में जब ईरान बुरी तरह से कोरोना के फैलाव में ग्रस्त है, अमरीकी प्रतिबंध, इस वायरस से संक्रमित लोगों की पहचान व उनके उपचार और कोरोना के फैलाव को रोकने की ईरान की प्रभावी कोशिशों के मार्ग में रुकावट बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है अमरीकी अधिकारी अवैध व अनैतिक प्रतिबंधों के कारण हो रही बदनामी से बचने के लिए यह दावा कर रहे हैं कि मानवीय व चिकित्सा सुविधाओं को प्रतिबंधों से अलग रखा गया है, लेकिन 27 फ़रवरी को बड़े शोर शराबे के साथ होने वाला "स्वीज़रलैंड मानवीय व्यापार समझौता" ईरान की वर्तमान मानवीय आवश्यकताओं से मेल नहीं खाता और इसका दायरा बड़ा सीमित है।
संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के प्रतिनिधि कार्यालय ने कहा है कि विदेशों में रोकी गई ईरान की संपत्ति को स्वीज़रलैंड में निर्धारित किए गए बैंक के माध्यम से ईरान लाना लगभग असंभव है और यह इस समझौते की अनुपयोगिता को सिद्ध करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में दवाएं बनाने वाली कुछ कंपनियों ने अमरीका के दबाव के चलते ईरान को दवाओं व चिकित्सा उपकरणों की बिक्री बंद कर दी है जो कोरोना वायरस से मुक़ाबले के लिए ज़रूरी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान पर लगे हुए प्रतिबंधों को तत्काल समाप्त किया जाना, एक आवश्यकता व पूरी मानवता के हित में है। रिपोर्ट में इसी तरह कहा गया है कि कोविड-19 के कारण स्थिति को अधिक जटिल होने से रोकने के लिए विश्व समुदाय को अमरीका पर दबाव डालना चाहिए कि वह दुनिया के लोगों के जीवन व उनके स्वास्थ्य को नुक़सान पहुंचाने के लिए प्रतिबंधों को अवैध व ग़ैर क़ानूनी माध्यम के रूप में इस्तेमाल न करे। (HN)