ट्रम्प ने ईरान के ख़िलाफ़ आख़िरी चाल भी चल दी
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ईरान में कोरोना संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि वाशिंगटन, कोरोना से निपटने में तेहरान की मदद के लिए तैयार है।
पोम्पियो के यह घड़ियाली आंसू अभी ख़ुश्क भी नहीं हुए थे कि अमरीका के वित्त मंत्रालय ने ईरान के 18 बैंकों पर प्रतिबंध लगाने का एलान कर दिया, ताकि दवाईयों और चिकित्सा उपकरणों के आयात के लिए अगर कोई रास्ता बचा हो तो तेहरान के लिए उसके भी दरवाज़े बंद कर दिए जाएं।
अमरीका, ईरान की लगभग सभी वित्तीय संस्थाओं और बैंकों पर प्रतिबंध लगा चुका है, जो छोटे बैंक बचे थे, वह सिर्फ़ दवाईयों और चिकित्सा उपकरणों की ख़रीदारी में सीमित पैमाने पर लेन-देन में सक्षम थे। इन बैंकों को इसीलिए अमरीकी वित्त मंत्रालय ने अभी तक प्रतिबंधों से छूट दे रखी थी।
इन बैंकों पर प्रतिबंध लगाकर, वास्तव में अमरीका ने ईरानी राष्ट्र पर सीधा आर्थिक हमला किया है और चिकित्सा तथा खाद्य पदार्थों के क्षेत्रों को निशाना बनाया है, ताकि भूख और महामारी का सहारा लेकर, ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर कर सके।
अभी तक ईरानी जनता को सरकार के मुक़ाबले में खड़ा करने की अमरीका की सारी कोशिशें नाकाम रही हैं। अमरीकी अधिकारी चाहते हैं कि ईरानी जनता विद्रोह कर दे और इस्लामी व्यवस्था को पलट दिया जाए। हालांकि उनका दावा होता है कि उनका लक्ष्य जनता नहीं, बल्कि शासन और व्यवस्था है।
जबकि सच्चाई यह है कि शुरू से ही ईरानी जनता, अमरीकी प्रतिबंधों के निशाने पर रही है और आज भी है। अमरीकी अधिकारी कितने भी दावे कर लें और आईआरजीसी और व्यवस्था को निशाना बनाने की बात करें, लेकिन इन प्रतिबंधों से सबसे अधिक प्रभावित होने वाली देश की जनता है।
ट्रम्प का राष्ट्रपति काल नवम्बर में ख़त्म हो रहा है और उन्होंने ईरान को घुटनों पर लाने के लिए पूरा ज़ोर लगा लिया है, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। अगर वह अगले चार साल के लिए और अमरीका की सत्ता संभालते हैं तो फिर भी ईरानी राष्ट्र और अधिकारियों को झुकाने में सफल नहीं हो सकेंगे।
हां, अमरीका जितना अधिक ईरान को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है, वह दुनिया में ख़ुद अलग-थलग पड़ता जा रहा है, जैसा कि अगस्त में राष्ट्र संघ सुरक्षा में पूरी दुनिया ने देखा। इसलिए अब ट्रम्प के पास, दवाईयों और खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने के अलावा, कोई विकल्प नहीं बचा है, ताकि ईरान में मरीज़ों और ग़रीबों को दुख देकर और कष्ट पहुंचाकर, वह ख़ुद को दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति होने का दावा कर सकें। msm