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चीनी एप्स पर प्रतिबंधः चीन के सरकारी मीडिया का रवैया इस प्रकार का है जैसे कोई बुजुर्ग किसी ग़ुस्साए नौजवान को समझाने की कोशिश कर रहा हो
Jul ०१, २०२० ०५:५५भारत सरकार ने चीन के साथ सीमा पर जारी तनाव और पूरे देश में पायी जा रही चीन विरोधी लहर के बीच एलान कर दिया कि 59 चीनी मोबाइल एप्लीकेशनों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है जिसमें टिक टाक और वीचैट जैसे कुछ एप काफ़ी मशहूर और लोकप्रिय थे।
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यूरोप को फ़िलिस्तीनियों की हमदर्दी नहीं इस्राईलियों की जान का डर है, अपने फ़ैसले से फ़िलिस्तीनियों के प्रतिरोध में नई शक्ति पैदा कर सकते हैं नेतनयाहू!
Jun ३०, २०२० ०४:०९इस समय जब इस्राईल वेस्ट बैंक के 30 प्रतिशत इलाक़ों को हड़पने की कोशिश में है और यह दरअस्ल 30 प्रतिशत नहीं बल्कि 82 प्रतिशत इलाक़ों को हड़पने की साज़िश है तो संयुक्त राष्ट्र संघ और यूरोपीय सरकारो की ओर से जो आलोचना हो रही है वह इसलिए है कि इन सरकारों को इस्राईल के ध्वस्त हो जाने का डर है। इन सरकारों के बयान फ़िलिस्तीनियों की मुहब्बत में नहीं आ रहे हैं।
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कहीं चीन से अनुमान की ग़लती तो नहीं हो रही है, क्या है चीन विरोधी एलायंस की बड़ी कमज़ोरी?
Jun २९, २०२० ०३:०३भारत और चीन के बीच सीमा पर गतिरोध के लंबा खिंचने के लक्षण दिखाई देने लगे हैं जबकि इस बीच अमरीका ने भी संकेत दिए हैं कि वह इस गतिरोध में भारत का साथ दे सकता है।
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अमरीका में कितना गिर गया है बहस का स्तर? "ट्रम्पः बोल्टन मूर्ख और पागल, बोल्टनः ट्रम्प के बाप तवायफ़ख़ाना चलाते थे!!"
Jun २७, २०२० ०३:४८इस समय अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और उनके पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन के बीच जारी जंग स्पष्ट रूप से यह दिखाती है कि अमरीका में बातचीत और बहस का स्तर इतना गिर गया है कि वह इतने बड़े अधिकारियों नहीं बल्कि सड़क पर चलते फिरते आम लोगों को भी शोभा नहीं देता।
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जब हिज़्बुल्लाह क्षेत्रीय ताक़त बन गया, ग़ज़्ज़ा पट्टी ताक़तवर हो गई, तालेबान से वार्ता पर अमरीका मजबूर हो गया, ईरान बहुत बड़ी शक्ति बन गया तो फिर अमरीकी प्रतिबंध मज़ाक़ नहीं तो क्या हैं?!
Jun २६, २०२० ०५:१८अमरीका ने पहले तो ईरान के उन पांच तेल टैंकरों के कपतानों पर प्रतिबंध लगाए जो पेट्रोल और अन्य पेट्रोकेमिकल पदार्थ लेकर वेनेज़ोएला गए थे और इसके एक दिन बाद अमरीका ने स्टील, सीसा और अन्य खदानों के क्षेत्रों में काम करने वाली आठ कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए।
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चीन का सरकारी मीडिया भारत को क्यों समझा रहा है कि अमरीका उसके काम नहीं आएगा?
Jun २५, २०२० १५:२५चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े अख़बार ग्लोबल टाइम्ज़ ने लेखक आइ जुन का एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें भारत को दो बातें समझाने की कोशिश की गई हैं।
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सऊदी अरब की राजधानी सहित कई ठिकानों पर इस बार होने वाला मिसाइल और ड्रोन हमला पिछले हमलों से कैसे अलग है? क्या रक्षा मंत्रालय और इंटेलीजेन्स मुख्यालय भी निशाना बने? क्या है संदेश?
Jun २५, २०२० ०५:४०यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ और अन्य स्थानों पर मौजूद ठिकानों पर जो मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं उनसे सबसे स्पष्ट संदेश यह सामने आया है कि यह आंदोलन अब क्षेत्रीय ताक़त बन चुका है जिसे नज़रअंदाज़ कर पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है।
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चीनी अख़बार का लेखः भारत जानता है कि वह चीन से जंग के क़ाबिल नहीं, टकराव हुआ तो 1962 से ज़्यादा बेइज़्ज़त होगी दिल्ली सरकार
Jun २२, २०२० ०२:३२चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्ज़ ने भारत चीन सीमा पर जारी तनाव के बीच एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें यह दिखाने की कोशिश की गई है कि भारत के पास चीन के मुक़ाबले में बहुत सीमित ताक़त है और भारत इस पोज़ीशन में नहीं है कि चीन का मुक़ाबला कर सके।
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क्या चीन के सामने मोदी ने हथियार डाल दिए? सीमा पर झड़पों को ज़्यादा अहमियत नहीं देना चाहते भारतीय प्रधानमंत्री मगर चीन का भारत पर तनाव बढ़ाने का आरोप
Jun २१, २०२० ०२:२२भारत और चीन ने एक दूसरे पर आरोप लगाए हैं कि वह बीते दिनों सीमा पर तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियां कर रहे हैं।
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बोल्टन की किताब परेशान तो करेगी लेकिन ट्रम्प के जनाधार को नुक़सान नहीं पहुंचा पाएगी
Jun २०, २०२० ११:०९इन दिनों अमरीका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन की किताब चर्चा के केन्द्र में है और अनुमान लगाया जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव से कुछ ही महीने पहले प्रकाशित होने वाली किताब ट्रम्प को बड़ा नुक़सान पहुंचा देगी।