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अमरीकियों से वार्ता दोस्त और घटक के रूप में नहीं दुशमन समझ कर की जाए....अगर अमरीकी सैनिक इराक़ से निकल गए तब तो ठीक और नहीं निकले तो जनता उन्हें मार कर नकालेगी
Jun १२, २०२० ०७:४६बग़दाद में गुरुवार की दोपहर से वीडियो कान्फ़्रेन्स के माध्यम से इराक़ अमरीका वार्ता शुरू हो गई जिसका मक़सद अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति के बारे में बहस करना और भविष्य में दोनों देशों के संबंधों की रूपरेखा के बारे में विचार करना है।
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ईरान ने अमरीकी विमान वाहक पोत का मॉडल बनाकर भेजा हुरमुज़ स्ट्रेट में, अमरीका में खलबली, क्या हमले के अभ्यास के लिए ईरान ने यह क़दम उठाया है? ब्रिटिश अखबार की रिपोर्ट
Jun ११, २०२० १२:२८टाइम्ज़ समाचार पत्र ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि ईरान के क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी ने अमरीकी विमानवाहक युद्ध पोत का एक मॉडल बना कर उसे परशियन गल्फ के मुहाने पर तैनात भी कर दिया है।
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तेज़ी से सामने आने लगा अमरीका में नस्लवाद के ख़िलाफ़ आंदोलन का नतीजा...बाइडन जीते तो अफ़्रीक़ी मूल की महिला होगी उप राष्ट्रपति...पहले ब्लैक जनरल को मिली वायु सेना की कमान
Jun ११, २०२० ०५:२४लोहे को लोहा काटता है और नस्लवादी कल्चर और उसके क़ानूनों को भारी जनान्दोलन से ही ख़त्म किया जा सकता है और पश्चिमी समाजों में फैली नाइंसाफ़ी और ग़ैर बराबरी को इसी रास्ते से दूर किया जा सकता है।
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पाकिस्तान के मुक़ाबले में दहाड़ने वाले चीन के सामने भीगी बिल्ली क्यों बने हुए हैं? मनमोहन सरकार पर कमज़ोर चीन नीति का आरोप लगाने वाले मोदी अब क्यों ख़ामोश हैं?
Jun १०, २०२० ०७:२१इधर लगभग एक महीने से ज़्यादा का समय हो गया है और लगातार भारत-चीन सीमा पर अलग-अलग दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष की ख़बरें सामने आ रही हैं। पहले उत्तरी सिक्किम के नाकू ला सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प की ख़बरें आई, उसके बाद ख़बर आई कि लद्दाख़ में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों के सैनिक पांच मई से ही आमने-सामने हैं।
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झूठ के माहिर हैं अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके दूत, सीरियाई सरकार ईरान से रिश्ता तोड़ने की पेशकश कभी स्वीकार नहीं करेगी,
Jun १०, २०२० ०२:४७जब सीरिया के मामले में अमरीका के विशेष दूत जेम्ज़ जेफ़री बड़ी बेशर्मी से इस बात पर गर्व करते हैं कि उनकी सरकार सीरिया की करेंसी को ध्वस्त करने की योजना पर काम कर रही है और इसी का नतीजा है कि सीरिया में आर्थिक समस्या बढ़ी है बाज़ार में विश्वास की कमी आई है तो इसका मतलब यह है कि अमरीका ने एक बार फिर जंग का एलान किया है।
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भारत सरकार और विपक्ष ने मिलकर जनता को आत्म निर्भर बना दिया!
Jun ०९, २०२० १४:४२भारत के गृह मंत्री अमित शाह का यह कटाक्ष कि कोरोना के मामले में विपक्ष ने क्या किया काफ़ी हद तक दुरुस्त लगता है। भारत में कोरोना वायरस की महामारी ने जब धीरे धीरे हाहाकार मचाई तो पूरे देश में एक ही चीज़ हर जगह नज़र आई कि संकट की गहरी छाया और भी गहरी होती जा रही है।
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कोरोना के बीच चुनावी बिगुल बजाते अमित शाह, नए तरीक़े के चुनाव प्रचार में मुद्दे वही पुराने, काश यह चुनाव कुछ पहले होते, शायद मज़दूरों का दर्द कुछ कम होता
Jun ०९, २०२० ०५:२०कोरोना वायरस के प्रकोप से आम चुनाव की व्यवस्था भी अछूती नहीं रही। प्रचार के लिए होने वाली चुनावी रैलियों का स्वरुप बदल रहा है। रैलियां तक वर्चुअल हो रही हैं। कोविड-19 प्रोटोकॉल के कारण पार्टियां वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर आ गई हैं। वैसे वर्चुअल रैलियों के लिए जितना बजट भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बेजेपी के पास है उतना किसी के पास नहीं है। इसलिए यह माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी मैदान मार ले जाएगी और यही कारण है कि पूरे भारत में कोरोना वायरस के जारी क़हर के बीच अमित शाह ने सबसे पहले
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ट्रम्प और पावेल के बीच छिड़ी ज़बानी जंग का विजेता कौन? रिपब्लिकन पार्टी के भीतर यह बग़ावत की शुरुआत है, हमारी नज़र में तो दोनों बराबर के अपराधी हैं!
Jun ०९, २०२० ०२:५२जब चोरों में लड़ाई हो जाए तो चोरी और चुराए गए माल की सारी सच्चाई सामने आ जाती है। यह कहावत इस समय अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और पूर्व विदेश मंत्री कोलिन पावेल की ज़बानी जंग पर बिल्कुल फ़िट बैठती है।
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कोरोना वायरस के बारे में कुछ ऐसी बातें जो शायद अभी तक आप न जानते रहे हों, क्या आप जानते हैं कि कोविड-19 के ख़तरनाक लक्षणों में एक बात समान है?
Jun ०७, २०२० ०६:३३इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के बढ़ते क़हर को लेकर चिंतित है। हर दिन इस वायरस को लेकर नए-नए शोध सामने आ रहे हैं। वैसे तो इस वायरस के की लक्षण बताए गए हैं लेकिन आज हम आपको इस वायरस के कुछ ख़तरनाक लक्षणों में पाई जाने वाली समानता के बारे में बाताएंगे। कोरोना वायरस सांस की बीमारियों तक सीमित रहने वाला वायरस नहीं है, बल्कि इसके कुछ सबसे खतरनाक लक्षणों एक बात समान है और वह ख़ून में बनने वाले थक्के, कि जिसे ब्लड क्लॉट्स भी कहते हैं।
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आख़िर भारत में हर मामले को संप्रदायिक रंग क्यों दिया जाने लगा है? राजनेताओं के साथ-साथ भारतीय मीडिया भी झूठ और नफ़रत फैलाने में सबसे आगे!
Jun ०७, २०२० ०४:२७आजकल भारत में एक हथिनी की मौत पर ख़ूब हंगामा मचा हुआ है। सोशल मीडिया के ज़रिए आग की तरह फैली इस ख़बर को लेकर जहां हर ओर हथिनी के मौत के कारणों को लेकर निंदा का दौर जारी है वहीं इस घटना को संप्रदायिक रंग भी दिया जाने लगा है।