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फ़ार्स खाड़ी के संकट को हल करने के लिए मचल उठा ट्रम्प का दिल, क्या इस्राईल के हितों की फ़िक्र सता रही है? कमज़ोर बैसाखियों की क्या कहानी है?
Sep ०९, २०१९ ०६:३५इस समय अमीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प फ़ार्स खाड़ी में क़तर के साथ सऊदी अरब, इमारात बहरैन और मिस्र के संकट को हल करवाने की कोशिश में बहुत मेहनत से लग गए हैं। क़तर का इन चार देशों ने जून 2017 से परिवेष्टन कर रखा है। इस बीच क़तर ने अमरीका से अपने संबंधों को नई गति देने की कोशिश की है।
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इस वक़्त कहां है आदरियान दरिया? क्या उसका मिशन पूरा हो गया?
Sep ०८, २०१९ १५:४०अगर यह दावा सही हो कि ईरान के तेल टैंकर ने सीरिया में अपनी खेप उतार दी है तो यह अमरीका के लिए करारा जवाब है।
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सऊदी ऊर्जा मंत्री को हटाए जाने की अस्ल वजह क्या है?
Sep ०८, २०१९ १३:२२ऐसा लगता है कि ख़ालिद अलफ़ालेह जो कभी सऊदी अरब के युवराज के विश्वास पात्र हुआ करते थे, बिन सलमान के सत्ताप्रेम के अनुसार उनके कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में विफल रहे हैं।
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समय बीतना, ईरान के लिए नहीं, अमरीका के नुक़सान में है, इस्राईल, इमारात व सऊदी अरब की पराजय के बाद अब अमरीका की हार की बारी है
Sep ०८, २०१९ ११:१४अमरीका के रक्षा मंत्री का यह दावा कि तेहरान धीरे-धीरे उस चरण के निकट हो रहा है जिसमें उससे वार्ता संभव होगी, उन चिन्हों के विपरीत है जो यह दर्शा रहे हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ ट्रम्प की अधिकतम दबाव की नीति विफल हो चुकी है।
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क्या इस्राईल के मीरकावा टैंकों की तरह ड्रोन विमानों का हौवा भी हिज़्बुल्लाह ही समाप्त करेगा? दक्षिणी बैरूत में गिरने वाले दोनों ड्रोन विमानों की ख़ुफ़िया सच्चाई क्या है? अरब जगत के प्रख्यात टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ा
Sep ०८, २०१९ ०४:२४हिज़्बुल्लाह और अवैध इस्राईली शासन के बीच शायद अगला टकराव लेबनान की वायु सीमा में होगा। इससे पहले अधिकतर टकराव अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के इलाक़ों में होते रहे हैं। शायद इस्राईल ने दक्षिणी बैरूत के ज़ाहिया इलाक़े में अपने दो ड्रोन विमान भेजकर एक नई लड़ाई की शुरुआत कर दी है।
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अमरीका की हालत भी सऊदी अरब जैसी! गठबंधन विश्व स्तर का बनाता है लेकिन आख़िर में अकेला रह जाता है!
Sep ०७, २०१९ ०४:४९सऊदी अरब और अमरीका में वैसे तो अनेक असमानताएं हैं, दोनों में कई आयामों से बड़ा अंतर है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन बनाने का एक मुद्दा एसा है कि इस समय दोनों देश इस मामले में बहुत समान दिखाई देते हैं।
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ईरानी आयल टैंकर के कप्तान को रिश्वत देने की नाकाम कोशिश बताती है कि अमरीका नैतिक रूप से कितना गिर चुका है, भारतीय कप्तान ने हम अरबों को क्या नैतिक पाठ दिया? अरब जगत के प्रख्यात टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ा
Sep ०६, २०१९ ०५:२४हम तो यह समझ रहे थे कि फ़ायनेन्शियल टाइम्ज़ में अमरीका के बड़े अधिकारी की ओर से ईरान के तेल टैंकर आदरियान दरिया-1 के कप्तान को कई मिलियन डालर की रिश्वत की पेशकश संबंधी रिपोर्ट में अतिशयोक्ति की गई है लेकिन जब अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की ओर से इस पर ज़ोर दिया गया तो हमें यक़ीन हो गया कि अमरीकी प्रशासन और उसकी संस्थाएं नैतिक रूप से बहुत गिर चुकी हैं।
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कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ क्यों नहीं दे रहे अरब देश?
Sep ०५, २०१९ १५:२९भारत प्रशासित कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है। फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों का भी पाकिस्तान को समर्थन नहीं मिल रहा है। इसके पीछे आर्थिक कारण को बड़ी वजह माना जा रहा है। लेकिन आने वाले समय में वे देश जो अभी पाकिस्तान का साथ नहीं दे रहे हैं वे भारत के साथ रहें, ऐसा ज़रूरी नहीं है।
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जब लिखता हुआ क़लम रुक जाए, बस वैसे ही है जैसे शरीर से आत्मा निकल जाए….
Sep ०५, २०१९ १३:३४आज कल जो भारतीय मीडिया की स्थिति है वह किसी से ढकी-छुपी नहीं रह गई है और इस बात में अब शायद ही किसी को कोई संदेह हो कि आज मीडिया का बड़ा हिस्सा- जिसमें प्रिंट और टेलीविज़न मीडिया शामिल है, सरकार के प्रचार-प्रसार का माध्यम बनकर रह गया है। यहां तक कि वे समाचार पत्र भी जो खुद को ‘संतुलित’ और ‘मध्यममार्गी’ मानते हैं, वे भी वैसी गंभीर ख़बरों को पिछले पन्नों पर धकेल दे रहे हैं, जो सरकार को अपने ख़िलाफ़ लग सकती है।
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एक सलाहकार की कहानीः मुहम्मद बिन सलमान के क़रीब जगह तो बना ली लेकिन शायद इसकी क़ीमत जान देकर अदा करनी पड़ी!
Sep ०५, २०१९ ११:२१सऊदी मूल की लेखिका मज़ावी रशीद ने ब्रिटेन स्थित मिडिल ईस्ट आई की वेबसाइट के लिए अपने एक लेख में सऊदी क़हतानी का मुद्दा उठाया है जिनका नाम सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले में बहुत उछला था।