मस्जिदुल अक़सा में इस्राईलियों का तांडव, दुनिया ख़ामोश...वीडियो
पूरी दुनिया के विरोध और फ़िलिस्तीनी गुटों की चेतावनियों के बावजूद ज़ायोनियों ने फ़्लैग मार्च निकाला और मस्जिदुल अक़सा में काफ़ी हंगामा किया और इस पवित्र स्थल का एक बार फिर अनादर हुआ।
फ़्लैग मार्च को देखते हुए इस्राईल ने मार्च के रूट पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे जबकि अमरीका जैसे इस्राईल के निकटवर्ती घटके ने फ़्लैग मार्च पर पुनर्विचार करने की अपील की थी लेकिन इस्राईल में कट्टरपंथी धड़ा हावी है और उसने सारे विरोध और चेतावनियों की अनदेखी करते हुए फ्लैग मार्च निकाला।
सुरक्षा घेरे में अतिग्रहणकारी बस्तियों के निवासियों ने फ़्लैग मार्च के नाम पर मस्जिदुल अक़सा की ओर पैदल मार्च किया और मार्च के शुरु से ही ज़ायोनी कट्टरपंथी भड़काऊ कार्यवाहियां कर रहे थे। पिछली रात से ही मस्जिदु अकसा और उसके आसपास के क्षेत्रों में हालात तनावपूर्ण थे और ज़ायोनी बस्तियों के निवासियों की रक्षा के लिए बड़ी संख्या में वर्दीधारक आतंकियों को तैनात किय गया था। एक और सूचना के अनुसार मस्जिदुल अक़सा में एतेकाफ़ पर बैठे फ़िलिस्तीनियों को उनकी जगहों पर बंद कर दिया गया था।
कट्टरपंथी इस्राईलियों के फ़्लैग मार्च का फ़िलिस्तीनियों ने कड़ा विरोध किया और मस्जिदुल अक़सा मैदाने जंग में तब्दील हो चुकी थी। फ़िलिस्तीनियों ने धैर्य का प्रदर्शन करते हुए अपना विरोध दर्ज किया... वर्ष 1967 की जंग में इस्राईल द्वारा बैतुल मुक़द्दस के कुछ प्राचीन इलाक़ों पर क़ब्ज़े की वर्सी के रूप में फ़्लैग मार्च निकाला जाता है। ज़ायोनियों का यह दावा है कि पूरा बैतुल मुक़द्दस शहर, जाली इस्राईली शासन की राजधानी है। वास्तव में यह कहा जा सकता है कि ज़ायोनियों का फ़्लैग मार्च, बैतुल मुक़द्दस में ज़ायोनी बस्तियों के विस्तार की भूमिका है।
पिछले साल की शमशीरे क़ुद्दस जंग के बाद इस्राईल को विभिन्न स्तरों पर कई अहम संदेश दिए गये और इसका परिणाम यह ज़ायोनियों ने भय की वजह से फ़्लैग मार्च को ही रद्द कर दिया था। दूसरे शब्दों में यूं कहा जा सकता है कि प्रतिरोध के मीज़ाइलों और राकेटों के जारी हमलों ने इस्राईलियों को बहुत ज़्यादा भयभीत कर दिया था जबकि फ़िलिस्तीनियों के साथ उनकी भीषण झड़पों की वजह से उन्होंने फ़्लैग मार्च कैंसिल कर दिया था। बहरहाल फ़िलिस्तीनियों ने फ़्लैग मार्च से पहले मीज़ाइलों का परीक्षण और हमास तथा अन्य प्रतिरोध कर्ता गुट ने अपने अपने बयानों में यह संदेश दे दिया था कि इस्राईल से बराबरी की लड़ाई का समय आ गया है और अब इस्राईल के दिन और भी कठिन होने वाले हैं। (AK)
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