सऊदी अरब पर बाइडन के तेवर नर्म कैसे पड़े
अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन सऊदी अरब को नफ़रत अंगेज़ बताते थे.....ट्रम्प पर एतेराज़ करते थे कि ख़ाशुक़जी के हत्यारों से इतने क़रीब क्यों हो रहे हैं मगर अब उनका रूप बदल गया है, कारण है ईंधन की क़ीमतें.....ईंधन की क़ीमत किसी भी तरह नीचे लाना ज़रूरी है।
शायद क़ीमत कुछ नीचे आ जाए क्योंकि सऊदी अरब कुछ उत्पादन बढ़ा सकता है। मगर हज़ारों दूसरी परेशानियां हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ में दुनिया में इकानामिक मैनेजमेंट पर नज़र रखने वाली डनहालैंड का कहना है कि अमरीका आर्थिक संकट की कगार पर है.....इंफ़्लेशन ने बढ़ने वाले दबाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस बीच सबसे ज़्यादा ख़ुशी ट्रम्प को है जो देख रहे हैं कि उनकी सरकार ख़त्म होने के 18 महीने बाद बाइडन को वोट देने वाले हर छह अमरीकियों में चार पछता रहे हैं। बाइडन को बढ़ चढ़ कर वोट देने वाले अश्वेत भी अब बाइडन के समर्थन से पीछे हट गए हैं। ट्रम्प को बस एक ही चिंता है कि छह जनवरी के मामले की अदालती कार्यवाही से किसी तरह सुरक्षित बच जाएं। इसी मामले में उनके सहयोगी स्टीव बेनन को अदालत में लाया गया है और वो ट्रम्प के ख़िलाफ़ गवाही देंगे। इस समय रिपब्लिकन पार्टी को वाइट हाउस की गद्दी हासिल करने की बड़ी उम्मीद हो गई है। न्यूयार्क से आईआरआईबी के लिए कामरान नजफ़ज़ादे की रिपोर्ट