अमरीका और सऊदी अरब के बीच बढ़ा तनाव
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तेल को लेकर सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच गंभीर मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct २७, २०२२ ११:०० Asia/Kolkata

तेल को लेकर सऊदी अरब और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच गंभीर मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

अमरीका द्वारा अपने रिज़र्व तेल को बाज़ार में लाने के फैसले से सऊदी अरब ने इसकी आलोचना की है।

तेल को लेकर अमरीका और सऊदी अरब के बीच जो ताज़ा मतभेद पैदा हुए हैं उसके बार में दोनो पक्षों की राय अलग-अलग है।  अमरीका का मानना है कि सऊदी अरब हमसे दूर होकर रूस से निकट हो रहा है।

ओपेल प्लस द्वारा बीस लाख बैरेल तेल की कटौती के फैसले के दो सप्ताहों के बाद अमरीका ने निर्णय लिया है कि वह अपने रिज़र्व तेल के कुछ भाग को बाज़ार में लाने जा रहा है।  तेल को दोनो देश को के बीच मतभेद संभवः यूक्रेन संकट के कारण हैं।  यूक्रेन युद्ध के बाद अमरीका ने इस बात का बहुत प्रयास किया कि सऊदी अरब अपने तेल के उत्पादन में वृद्धि कर दे।  रेयाज़ ने अमरीका की बात को रद्द करते हुए तेल में वृद्धि के स्थान पर अपने उत्पादन में ही कमी कर दी।  इस प्रकार से अमरीका का मानना है कि सऊदी अरब अब हमसे दूर होकर रूस से निकट हो रहा है।

रेयाज़ ने इस दावे को रद्द कर दिया है।  सऊदी अरब ने कहा है कि तेल के उत्पादन को घटाने का का उसका फैसला, केवल आर्थिक दृष्टि से है कूटनीतिक दृष्टि से नहीं।  ओपेक प्लस के फैसले को विफल बनाने के लिए अमरीका ने अपने रिज़र्व तेल भण्डार से तेल निकालने का फैसला किया है।  सऊदी अरब ने अमरीका के इस फैसले को तेल के बाज़ार में अमरीकी हस्तक्षेप की संज्ञा दी है।

परस्पर मतभेदों के बारे में सऊदी अरब का यह मानना है कि तेल के मामले में अमरीका, उसकी स्वतंत्रता को अनदेखा करते हुए उसका अपमान कर रहा है।  इस बात को सऊदी अरब की महिला राजदूत ने भी बयान किया है।  सीएनएन को दिये साक्षात्कार में रीमा बिन्ते बंदर ने कहा कि हम यह सुन रहे हैं कि कुछ लोग अमरीका और सऊदी अरब के संबन्धों में पुनर्विचार की बात कह रहे हैं।  उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक बात है क्योंकि वर्तमान समय का सऊदी अरब, दस साल पहले वाला सऊदी अरब नहीं है।

यहां पर ध्यानयोग्य बिंदु यह है कि वाशिग्टन तथा रेयाज़ के बीच मतभेद एसे में बढ रहे हैं कि जब अमरीका में कांग्रेस के चुनाव होने जा रहे हैं।  इस बारे में कुछ टीकाकारों का यह मानना है कि एसा लग रहा है कि इन चुनावों में डेमोक्रैट्स को पराजित करने के लिए अब रूस और सऊदी अरब एकजुट हो गए हैं।

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