क्या सऊदी अरब और इमारात के बीच मतभेद बढ़ गये हैं?
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सऊदी अरब की तेल की नीति के नाराज़ संयुक्त अरब इमारात ने ओपेक से निकलने का फ़ैसला कर लिया है जिसके बाद सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान अपने घटक यूएई के शासक मुहम्मद बिन ज़ाएद की योजना को नाकाम बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec २४, २०२२ १३:५३ Asia/Kolkata
  • क्या सऊदी अरब और इमारात के बीच मतभेद बढ़ गये हैं?

सऊदी अरब की तेल की नीति के नाराज़ संयुक्त अरब इमारात ने ओपेक से निकलने का फ़ैसला कर लिया है जिसके बाद सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान अपने घटक यूएई के शासक मुहम्मद बिन ज़ाएद की योजना को नाकाम बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

रोयटर्ज़ की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त अरब इमारात ने एक कार्यक्रम बनाया है कि 28 नवम्बर को दुबई में आयोजित होने वाली जलवायु कांफ़्रेंस से पहले 2023 में ज़्यादा से ज़्या तेल यूरोप को बेचकर तेल बेचने वाले देशों में सर्वोपरि हो जाए।

62 साल पहले ओपेक के गठन के बाद संयुक्त अरब इमारात 55 वर्षों से तेल निर्यात करने वाले देशों की संस्था ओपेक का महत्वपूर्ण सदस्य समझा जाता है। अलबत्ता ओपेक की वर्तमान नीति किसी भी प्रकार से संयुक्त राष्ट्र संघ के हक़ में नहीं है, इसीलिए उसे एक दिन में केवल 3 मिलियन बैरल तेल निकालने की अनुमति है जबकि वह इससे कहीं ज़्याद यानी हर दिन 4 मिलियन बैरल तेल निकालने की क्षमता रखता है। (AK)