जनरल सुलैमानी ने अमरीका की कई योजनाओं को विफल बनायाः नसरुल्लाह
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव का कहनाह कि जनरल क़ासिम सुलैमानी विलायते फ़क़ीह के सिपाही थे और उन्होंने वसीयत की थी कि मेरी क़ब्र पर विलायत का सिपाही लिखना और इस तरह उन्होंने ज़िंदगी भी गुज़ारी।
शहीद जनरल कासिम सुलैमानी ईरान की सिपाहे पासदारान फोर्स आईआरजीसी की कुद्स ब्रिगेड के कमांडर थे और इराकी सरकार के आधारिक निमंत्रण पर सीरिया से इराक जा रहे थे कि अमेरिका के आतंकवादी सैनिकों ने ड्रोन से बगदाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के करीब उन पर हमला करके तीन जनवरी 2020 को शहीद कर दिया था। उनके साथ इराक की स्वंय सेवी सेना हश्दुश्शाबी के डिप्टी कमांडर अबू मेहदी अलमोहन्दिस और उनके साथ 8 दूसरे जवान शहीद हुए थे। अमेरिका के इस आतंकवादी हमले की पूरी दुनिया में निंदा हुई थी।
हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने जनरल क़ासिम सुलैमानी और अबू महदी अलमुहन्दिस की शहादत की तीसरी बर्सी के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि जनरल क़ासिम सुलैमानी हमेशा से प्रतिरोध के हर मैदान में मौजूद रहे।
उनका कहना था कि कुछ लोग यह दिखाने का प्रयास करते हैं कि फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ता गुट ईरान और उसके घटकों के हाथों का हथकंडा हैं लेकिन कभी भी ऐसा हरगिज़ नहीं है, ईरान एक बड़ी और महत्वपूर्ण शक्ति तथा क्षेत्र में प्रभावी ताक़त है।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि जनरल क़ासिम सुलैमानी ने प्रतिरोधकर्ता गुटों के मज़बूत होने में अहम भूमिका अदा की है, उनमें संकटों और कठिन हालात में काम करने का जज़्बा था और पिछले 20 साल से जनरल क़ासिम सुलैमानी प्रतिरोध की ज़ंजीर को जोड़ने वाली कड़ी थे।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि शही सुलैमानी ने दो दश्कों तक क्षेत्र अमरीका की दो योजनाओं का पूरी शक्ति से मुक़ाबला किया और उसे विफल बनाया और क्षेत्र में अमरीका की तीसरी योजना से मुक़ाबले के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि अमरीका का लक्ष्य क्षेत्र पर वर्चस्व जमाना और क्षेत्र के प्राकृतिक व गैस व तेल के स्रोतों पर नियंत्रण करना और क्षेत्र में राजनैतिक फ़ैसले भी लेना है।
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि जिसने इराक़ से प्रतिरोध शुरु किया, वह इराक़ी ग्रुप और पार्टियां थीं जिनको जनरल क़ासिम सुलैमानी ने अबू महदी के साथ मिलकर ट्रेनिंग दी और उन्हें तैयार किया।
उनका कहना था कि अगर सीरिया ने प्रतिरोध न किया होता तो इराक़ में प्रतिरोध की शक्ति पैदा नहीं हो सकती थी, अगर शहीद सुलैमानी और एमाद मुग़निया न होते तो अमरीका क्षेत्र पर क़ब्ज़ा कर चुका होता।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि निसंदेह अमरीकी सरकार ने पहले ही जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या की योजना की समीक्षा कर चुकी थी और अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उसने यह काम किया, अमरीकी सरकार का पहला लक्ष्य, प्रतिरोध के मोर्चे को विफल बनाना था। (AK)
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