पाप का घड़ा फुटता ज़रूर है
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दुनिया में अनगिनत घटनायें हो चुकीं और इस समय भी हो रही हैं पर इन घटनाओं से कुछ ही लोग सीख ले पाते हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १८, २०२३ १०:४८ Asia/Kolkata
  • पाप का घड़ा फुटता ज़रूर है

दुनिया में अनगिनत घटनायें हो चुकीं और इस समय भी हो रही हैं पर इन घटनाओं से कुछ ही लोग सीख ले पाते हैं।

इस समय पश्चिम एशिया या मध्यपूर्व का एक महत्वपूर्ण परिवर्तन इस्राईल में होने वाला परिवर्तन है। हालिया कई दिनों से जायोनी और यहूदी, नेतनयाहू के खिलाफ सड़कों पर उतर आये हैं जबकि बिनयामिन नेतनयाहू एक अतिवादी जायोनी हैं। इस समय इस्राईल के जो हालात हैं वे अपने अंदर बहुत सारे संदेश लिए हुए हैं। उसका एक संदेश यह है कि इस्राईल दिन- प्रतिदिन बड़ी तेज़ी से अपने अंत के निकट होता जा रहा है और यह वह बिन्दु है जिसकी ओर जानकार हल्के और खुद जायोनी संचार माध्यम संकेत कर रहे हैं।

जायोनी संचार माध्यमों ने अभी गत रात्रि ही स्वीकार किया है कि इस्राईल के बारे में दक्षिणी लेबनान के इस्लामी आंदोलन हिज्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह का यह दृष्टिकोण व्यवहारिक हो रहा है कि इस्राईल अंदर से खोखला और वह मकड़ी के जाले से भी कमज़ोर है। जिस वक्त सैयद हसन नसरुल्लाह ने यह बात कही थी उस समय बहुत कम लोगों इस बात पर विशेषरूप से ध्यान दिया होगा पर आज जायोनी हल्के और संचार माध्यम खुद ही उनकी बात को याद दिला रहे हैं।

पूरा इतिहास गवाह है कि जायोनियों व यहूदियों की कोई भी सरकार 80 साल से अधिक न चल पायी। इस बात को दृष्टि में रखते हुए बहुत से जायोनियों और यहूदियों का विश्वास है कि इस्राईल की उम्र भी 80 साल से अधिक नहीं होगी। बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि इस्राईल के अंदर से ही हालत इस प्रकार के हो जायेंगे जिससे इस्राईल का अंत हो जायेगा और उसे तबाह करने के लिए किसी बाहरी शक्ति की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। ये हल्के दूसरे देशों व क्षेत्रों से इस्राईल लाकर फिलिस्तीनियों की मातृभूमि पर बसा दिये गये जायोनियों व यहूदियों को उल्टे पलायन को इसी परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं।

सवाल यह पैदा होता है कि इस्राईल इतनी तेज़ी से अपने अंत से निकट क्यों हो रहा है?जानकार हल्कों का मानना है कि इसके बहुत से कारण हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण कारण इस्राईल का घोर अत्याचार है। 76 साल पहले अवैध जायोनी शासन की बुनियाद मज़लूम फिलिस्तीनियो के खून पर रखी गयी तब से लेकर आज तक इस अवैध शासन के अत्याचार अनवरत जारी हैं और इन वर्षों में एक लाख से अधिक फिलिस्तीनी शहीद और कई लाख घायल व बेघर हो गये। चालिस लाख से अधिक फिलिस्तीनियों को इस्राईल ने ताकत के बल उन्हें उनकी मातृभूमि से निष्कासित कर रखा है और उन्हें स्वदेश वापसी की अनुमति भी नहीं दे रहा है।

रोचक बात यह है कि इस्राईल के समस्त अपराधों पर मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले अर्थपूर्ण चुप्पी साधे रहते हैं और मानवाधिकार की रक्षा का राग अलापने वाले देश व संगठन कभी भी नहीं कहते हैं कि चालिस लाख से अधिक निर्दोष फिलिस्तीनियों को स्वदेश आने की अनुमती देनी चाहिये और अगर एसा नहीं किया जाता है तो चालिस लाख से लोगों के अधिकारों की अनदेखी व हनन है।

जब से जायोनी शासन की अवैध बुनियाद रखी गयी है तब से उसने जहां एक लाख से अधिक फिलिस्तीनियों को शहीद किया है उनमें बहुत सी महिलायें और बच्चे भी हैं। इसी प्रकार इन वर्षों में इस्राईल ने फिलिस्तीनियों के हज़ारों मकानों को ध्वस्त कर दिया, उनके खेतों और बागों को तबाह कर दिया और उनके बहुत से पेड़ों को काट दिया। उनकी ज़मीनों और मकानों पर कब्ज़ा कर लिया।

सारांश है कि इस्राईल फिलिस्तीनियों पर जो भी अत्याचार कर सकता था किया और इसमें उसने किसी प्रकार के संकोच से काम नहीं लिया और उसका नतीजा यह निकला कि पाप का घड़ा भर गया है और जायोनी, दुनिया से अत्याचार और सरकारी आतंकवाद पर आधारित शासन के अंत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। MM

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