क्या इस्राईल में हेब्रू स्प्रिंग की शुरूआत हो चुकी है?
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इस्राईली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने अपनी सरकार के प्रस्तावित न्यायिक सुधारों के स्थगन का एलान कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद मीडिया में इस्राईल में हेब्रू स्प्रिंग की चर्चा ज़ोरों पर है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar २९, २०२३ १०:११ Asia/Kolkata
  • क्या इस्राईल में हेब्रू स्प्रिंग की शुरूआत हो चुकी है?

इस्राईली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने अपनी सरकार के प्रस्तावित न्यायिक सुधारों के स्थगन का एलान कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद मीडिया में इस्राईल में हेब्रू स्प्रिंग की चर्चा ज़ोरों पर है।

पिछले कुछ महीनों से इस्राईल में बहुत बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, यह प्रदर्शन अभूतपूर्व हैं, जिनमें 7 लाख तक प्रदर्शनकारी शामिल हुए हैं। वास्तव में नेनतयाहू ने कुछ कट्टर दक्षिणपंथी गुटों के साथ मिलकर सरकार का गठन किया है, जो सुप्रीम कोर्ट की शक्ति को सीमित करने पर बल दे रहे हैं।

दूसरी ओर इस्राईल में विपक्षी दलों का मानना है कि अगर नेतनयाहू सरकार न्यायिक सुधार बल पारित करती है तो लोकतंत्र ख़तरे में पड़ जाएगा और सरकार या संसद जब चाहेगी, सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को पलट देगी।

इस्राईल में जारी इन घटनाक्रमों को अरब मीडिया में हेब्रू स्प्रिंग के नाम से याद किया जा रहा है। अरब मीडिया के इस विश्लेषण ने ज़ायोनियों को क्रोधित कर दिया ह।

इस्राईली अख़बार हारेट्ज़ ने इस्राईल में जारी राजनीतिक गतिरोध को हेब्रू स्प्रिंग का नाम दिए जाने की आलोचना की है। इस्राईली अख़बार ने ख़ास तौर पर मिस्री मीडिया की आलोचना की है, जिसने हेब्रू स्प्रिंग को ज़ायोनी शासन के लिए सबसे बड़ा झटका क़रार दिया है। हारेट्ज़ ने इस्राईल में घनटे वाले घटनाक्रमों को इस्राईल का अंत क़रार देने की भी आलोचना की है।

नेतनयाहू ने विवादित न्यायिक सुधारों के स्थगन का तो एलान कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद ज़ायोनी सरकार के दो फ़ैसलों ने इस्राईल में विरोधियों को आग बगूला कर दिया है। पहला यह कि नेतनयाहू ने प्रस्तावित न्यायिक सुधारों की आलोचना करने वाले अपने रक्षा मंत्री को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। नेतनयाहू के इस फ़ैसले ने आग में घी डालने का किया और रविवार और सोमवार को लाखों लोग सड़कों पर निकल आए और उन्होंने सरकार का विरोध किया। इसके अलावा, ज़ायोनी शासन के इस फ़ैसले का सेना में भी विरोध हुआ और सैन्य अधिकारियों ने ज़ायोनी रक्षा मंत्री के समर्थन में आवाज़ उठाई।

इस्राईल के एक पूर्व सैन्य अधिकारी ऐमी आयलून का कहना है कि नेतनयाहू ने सेना को भंग करने और इस्राईल की सुरक्षा को ख़तरे में डालने वाला दूसरा क़दम उठा लिया है।  

नेतनयाहू का दूसरा क़दम अपने समर्थकों को काउंटर प्रदर्शन करने के लिए उकसाना है। इसके बाद इस्राईल में सरकार विरोधियों और समर्थकों के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है। यह टकराव गृह युद्ध का रूप भी ले सकता है। यही वजह है कि पूर्व प्रधान मंत्री नफ़्ताली बेनेत ने सोमवार को इस संदर्भ में गहरी चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि इस्राईल अपने इतिहास के सबसे संवेदनशील दौर से गुज़र रहा है।