इमारात में सत्ता का खेल, इतिहास है ख़ूंख़ार
संयुक्त अरब इमारात के प्रमुख मोहम्मद बिन ज़ायद ने आखिरकार देश के नए युवराज के नाम का एलान करते हुए अपने बेटे ख़ालिद बिन मोहम्मद को इस पद पर नियुक्त कर दिया।
मोहम्मद बिन ज़ायद को उनके भाई की मृत्यु के बाद पिछले साल मई में संयुक्त अरब इमारात के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था। अब यूएई के प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति की पहली वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर देश के नए युवराज के नाम का भी एलान कर दिया गया।
मई 2022 में यूएई सरकार के प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद मोहम्मद बिन ज़ायद के दौर में यह सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक फ़ैसला है।
अबू धाबी के युवराज के चयन पर यूएई का संविधान ख़ामोश है और इस तरह यूएई के शासक के पास इस संबंध में पूरा अधिकार होता है लेकिन यूएई के प्रमुख और उतराधिकारी के रूप में 41 वर्षीय ख़ालिद बिन मोहम्मद बिन जायद की नियुक्ति से इस संभावना को बल मिलता है कि
संयुक्त अरब इमारात के मोहम्मद बिन ज़ायद के प्रमुख बनने के बाद द इकोनॉमिस्ट ने बताया था कि मोहम्मद बिन ज़ायद की पहली चुनौती, एक क्राउन प्रिंस को चुनना है। आज का क्राउन संभावित रूप से प्रिंस कल का देश प्रमुख हो। मोहम्मद बिन ज़ायद के संयुक्त अरब इमारात के प्रमुख बनने के 11 महीने बाद नए क्राउन प्रिंस का चयन, क्राउन प्रिंस को चुनने की चुनौती की पुष्टि और आले नहयान परिवार में क्राउन प्रिंस के महत्वपूर्ण पद को धारण करने की प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है।
इस प्रतिस्पर्धा में मुहम्मद बिन ज़ायद के बेटे ने बाज़ी मार ली, लेकिन यह जीत मुहम्मद बिन ज़ायद और उनके बेटे के लिए थोड़ी सी चूक या तनाव के कारण बहुत महंगी पड़ सकती है।
एक सदी पहले नहियान क़बीले के कुछ सदस्यों ने सत्ता हथियाने के लिए अपने भाइयों की हत्या कर दी थी। 1920 के दशक में अबू धाबी के चार शासक थे।
मोहम्मद बिन ज़ायद ने ऐसी स्थिति अपने बेटे को क्राउन प्रिंस के पद पर नियुक्त किया कि जब उनके दो भाई तहनून बिन ज़ायद और अब्दुल्लाह बिन जायद भी क्राउन प्रिंस के पद पर नज़र गड़ाए हुए थे और उनके पास इस पद को धारण करने का एक अच्छा मौका था। तहनून बिन ज़ायद के पास यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में काम करने का बड़ा अनुभव है जबकि उनके पास अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी काफ़ी अनुभव है।
यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्लाह बिन ज़ायद भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूएई की जानी-मानी हस्तियों में से एक हैं, यह ऐसी हालत में है कि ख़ालिद बिन ज़ायद के पास ज्यादा अंतरराष्ट्रीय अनुभव नहीं है और पिछले साल में मोहम्मद बिन जायद ने अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को मज़बूत करने की बहुत कोशिश की।
इस स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि अबू धाबी के नए क्राउन प्रिंस के रूप में ख़ालिद बिन मोहम्मद बिन जायद की नियुक्ति को संयुक्त अरब इमारात में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया की परंपरा के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
खालिद के चुनाव का मतलब यह माना जाता है कि मुहम्मद बिन जायद ने अपने भाइयों तहनून बिन ज़ायद और अब्दुल्लाह बिन ज़ायद से मुंह मोड़ लिया ताकि अबू धाबी में सत्ता, मुहम्मद बिन ज़ायद के भाई के बजाय उनकी अगली पीढ़ी के बच्चों को स्थानांतरित कर दी जाए। (AK)
हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए
हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए