हिज़बुल्ला और हमास के निकट आने से घबराए ज़ायोनी
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आन्दोलन हिज़बुल्ला और फ़िलिस्तीन के प्रतिरोध आन्दोलन हमास के नेताओं ने लेबनान की राजधानी बेरूत में कल मुलाक़ात की।
इस मुलाक़ात में सैयद हसन नसरुल्ला और इस्माईल हनिया ने क्षेत्रीय परिवर्तनों के साथ ही मस्जिदुल अक़सा में ज़ायोनियों द्वारा की गई हिंसक कार्यवाही पर भी विचार-विमर्श किया।
दोनो नेताओं ने क्षेत्रीय हालिया परिवर्तनों के संदर्भ में प्रतिरोध की क्षमता, तत्परता और परस्पर सहयोग जैसे मुद्दों पर भी वार्ता की। हिज़बुल्लाह के महासचिव और हमास की राजनीतिक शाखा के प्रभारी के बीच भेंटवार्ता एसी हालत में हुई है कि जब अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में अशांति बनी हुई है। हालिया दिनों में लेबनान और सीरिया की ओर से ज़ायोनी शासन की ओर कई राकेट दाग़े गए थे। 6 अप्रैल की शाम को ज़ायोनी संचार माध्यमों ने दक्षिणी लेबनान की ओर से कई राकेट फाएर किये जाने की सूचना दी थी।
इनके अनुसार दक्षिणी लेबनान की ओर से 100 से अधिक राॅकेट, जायोनी कालोनी वासियों की ओर दाग़े गए थे। इससे पहले फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधक गुटों ने घोषणा की थी कि मस्जिदुल अक़सा पर ज़ायोनी सैनिकों के बढ़ते आक्रमण के लिए अब एक जनान्दोलन की ज़रूरत है।ज़ायोनी सैनिकों ने बुधवार की सुबह मस्जिदुल अक़सा से 240 नमाज़ियों को गिरफ़्तार किया था। इन सैनिकों ने फ़िलिस्तीनी नमाज़ियों के विरुद्ध बल का प्रयोग किया।
अब फ़िलिस्तीनी गुटों के मैदान में आ जाने से कई मोर्चों पर झड़पों की संभावना बढ़ गई है। इसी बीच प्रतिरोधक गुटों की ओर से अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में राकेट और मिसाइल बरसाए जाने से ज़ायोनियों में चिंताएं पैदा हो गई हैं। अवैध ज़ायोनी शासन के कुछ क्षेत्रों पर राकेट और मिसाइल के हमलों के बाद अब इस्राईल के राजनीतिक और सैनिक हल्क़ों में गंभीर चिंता व्याप्त हो गई है। वे अब इस बात को लेकर बहुत चिंतित हैं कि उत्तरी क्षेत्र में हिज़बुल्लाह से और दक्षिणी क्षेत्र में फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधी गुटों की ओर से हमलों का ख़तरा बढ़ गया है।
उधर अवैध ज़ायोनी शासन ने सैन्य प्रशिक्षण के एक नए प्रस्ताव को पारित किया है जिसके अन्तर्गत कई मोर्चों पर युद्ध में मुक़ाबला करने की बात कही गई है। इस योजना में वहां की सेना की समस्त इकाइयों की भागीदारी अनिवार्य कर दी गई है। हालांकि ज़ायोनी शासन की सैन्य कमान का मानना है कि वहां की सेना में कई मोर्चों पर युद्ध लड़ने की क्षमता नहीं है। इस शासन को अपनी थल सेना के भीतर पाई जाने वाली समस्याओं से बहुत चिंता है। इसके अतिरिक्त ज़ायोनी शासन को अब प्रतिरोध के ड्रोन और पिन प्वाइंट मिसाइलों का सामना है। इसी के साथ प्रतिरोध के मोर्चे को वह अनुभव भी हासिल है जो उसने आतंकवाद विरोधी अभियान में भाग लेकर हासिल किया है।
हारेत्स के अनुसार इस्राईल को इस समय उन दुश्मनों का सामना है जो उसको हर ओर से घेर चुकेे हैं। यही कारण है कि लेबनान की राजधानी बेरूत में सैयद हसन नसरुल्ला और इस्माईल हनिया की मुलाक़ात ने उसको गंभीर चिंता में डाल दिया है।
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