फ़िलिस्तीनियों के समर्थन में आने लगे कई राष्ट्र
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अवैध ज़ायोनी शासन के भीतर फ़िलिस्तीनियों की कार्यवाही का व्यापक स्तर पर समर्थन किया जा रहा है। 
(last modified 2023-10-09T08:36:26+00:00 )
Oct ०९, २०२३ १४:०६ Asia/Kolkata

अवैध ज़ायोनी शासन के भीतर फ़िलिस्तीनियों की कार्यवाही का व्यापक स्तर पर समर्थन किया जा रहा है। 

अलअक़सा तूफ़ान का समर्थन इस्लामी गणतंत्र ईरान, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, क़तर, कुवैत और सऊदी अरब द्वारा किया जा चुका है।इन देशों का मानना है कि अवैध ज़ायोनी शासन के अत्याचारों के मुक़ाबले में अपनी रक्षा करना फ़िलिस्तीनियों का अधिकार है। 

अबतक ज़ायोनियों की सोच यह थी कि अमरीका के समर्थन से वे शांतिपूर्ण ढंग से इस्राईल में रहेंगे और साथ ही कुछ अरब देशों के साथ कूटनीतिक संबन्धों सामान्य करके अपनी सुरक्षा को अधिक सुनिश्चित बना लेंगे।  लेकिन फ़िलिस्तीन के प्रतिरोध कर्ताओं के हालिया हमले ने यह बता दिया कि उनकी सोच पूरी तरह से ग़लत थी। 

हमास की ओर से इस्राईल के भीतर हमला और उसके बाद वहां के सैनिकों को पकड़कर लाए जाने के बाद अब ज़ायोनियों के ग़लत समीकरण धराशाई हो चुके हैं।  उनको अब यह लगने लगा है कि वे इस्राईल में सुरक्षित नहीं हैं।  न ही आयरन डोम और न ही वहां की सेना कोई भी उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं बना सकता। 

इस बारे मे क्षेत्रीय मामलों के एक जानकार अली ख़ज़ाई कहते हैं कि अलअक़सा तूफ़ान में ज़ायोनियों के भारी जानी मानी नुक़सान तथा फ़िलिस्तीनियों के हाथों दसियों ज़ायोनी सैनिकों की गिरफ्तारी ने इस विचार को पूरी तरह से रद्द कर दिया है कि अत्याधुनिक हथियारों से लैस होने के बावजूद अवैध ज़ायोनी शासन सुरक्षित नहीं है।  न तो उनके समर्थक और न ही हथियार, ज़ायोनियों को सुरक्षित नहीं रख सकते।  फ़िलिस्तीनियों के दृढ संकल्प के सामने वे कुछ भी बाक़ी नहीं रह पाए हैं। 

जार्डन, इराक़, लेबनान और कुछ अन्य देशों में फ़िलिस्तीनियों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन यह बताता है कि अवैध ज़ायोनियों को लेकर इस्लामी राष्ट्रों की एकता, इस अवैध शासन के समीकरणों को धराशाई बना देगी।  यह शासन अमरीकी समर्थन से ही बचा हुआ है और उसी के समर्थन पर कुछ देशों के साथ संबन्ध सामान्य करने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ रहा है।  ज़ायोनी सोचते हैं कि उन्होंने इस्राईल में अपनी स्थति को बहुत ही मज़बूत कर लिया है।  हालांकि उनके इस भ्रम को फ़िलिस्तीनियों की 7 अक्तूबर की कार्यवाही ने पूरी तरह से तोड़ दिया।

हमास के एक नेता ख़ालिक अलक़ुदुमी ने कहा है कि हम किसी को भी फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों को नष्ट करने की अनुमति नहीं देंगे।  हमने इसीलिए अलअक़सा तूफान नामक अभियान आरंभ किया है।  फ़िलिस्तीनियों की कार्यवाही ने इस्राईल के खोखले अजेय होने के दावे की पोल खोल कर रख दी।  फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ताओं ने दर्शा दिया है कि वे कभी भी ज़ायोनियों से प्रभावित नहीं होंगे।  वर्तमान समय में इस्राईल से सांठगांठ करने वालों को भी समझ लेना चाहिए कि हालात ने करवट ली है।  फ़िलिस्तीनियों के बढ़ते समर्थन से परिस्थतियां, उनके हित में मुड़ती चली जाएंगी और अंततः फ़िलिस्तीन को पूरी तरह से स्वतंत्र कराने की भूमिका बनेंगी।

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