इस्राईल को लेकर दो भागों में बट गया अमरीका
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इस्राईल या अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की हालिया घटनाओं विशेष रूप से अलअक़सा तूफ़ान आप्रेशन और ग़ज़्ज़ा पर ज़ायोनी शासन के हमलों को लेकर अमरीकी राजनेता बटे हुए नज़र आते हैं।
(last modified 2023-10-12T05:43:09+00:00 )
Oct १२, २०२३ ११:१३ Asia/Kolkata
  • इस्राईल को लेकर दो भागों में बट गया अमरीका

इस्राईल या अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की हालिया घटनाओं विशेष रूप से अलअक़सा तूफ़ान आप्रेशन और ग़ज़्ज़ा पर ज़ायोनी शासन के हमलों को लेकर अमरीकी राजनेता बटे हुए नज़र आते हैं।

जहां रिपब्लिकन नेता और डेमोक्रेटिक पार्टी के अधिकतर सदस्य चाहते हैं कि फ़िलिस्तीनियो के ख़िलाफ़ अधिक कठोर कार्यवाही की जाए वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुत से नेताओं का कहना है कि इस्राईल की गतिविधियां आपराधिक हैं।

हमास के हालिया आपरेशन के बारे में इंटेलीजेंस रिपोर्ट जारी होने के बाद रिपब्लिकन सांसदों का क्रोध आसमान पर पहुंच गया है। बाइडन सरकार की तरफ़ से इस विषय पर ब्रीफ़िंग की मीटिंग का कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने बहिष्कार किया। रिपब्लिकन नेताओं को ईरान के बारे में बाइडन सरकार की नीतियों, इस्राईल को दी जाने वाली सैनिक सहायता और इस्राईल से अमरीकी नागरिकों को स्वेदश वापसी को लेकर भारी आपत्ति है।

आक्सियस वेबसाइट ने लिखा कि यह स्थिति दिखाती है कि अलअक़सा तूफ़ान आप्रेशन के बाद अमरीकी नेताओं में जो सहमति बनी थी वह फिर बिखर गई है। अमरीकी विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और ख़ुफ़िया एजेंसी की तरफ़ से मीटिंग में बताया गया कि हमास के आप्रेशन से ईरान का संबंध होने का कोई भी सुबूत नहीं है। रिपब्लिकन नेता हमास के आप्रेशन से ईरान को जोड़कर यह चाहते थे कि ईरान के ख़िलाफ़ अमरीकी सरकार की तरफ़ से कड़ाई बरती जाए। इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इस बारे में कहा कि पिछले दो तीन दिनों में ज़ायोनी शासन के कुछ अधिकारियों और इस शासन के कुछ समर्थकों ने बेबुनियाद बयानबाज़ी की है कि इस आप्रेशन के पीछे ईरान का हाथ है मगर वो ग़लती कर रहे हैं। हम फ़िलिस्तीन का समर्थन करते है और इस आप्रेशन के योजनाकारों की पेशानी और बाज़ू चूमते हैं लेकिन यह आप्रेशन ख़ुद फ़िलिस्तीनियों का है।

डेमोक्रेट सेनेटर बर्नी सेंडर्ज़ ने जो ख़ुद भी यहूदी हैं ज़ायोनी शासन पर अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का हनन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ज़ायोनी शासन ने ग़ज़्ज़ा पट्टी की नाकाबंदी करके इस इलाक़े को खुली जेल बना दिया है। वहां दसियों लाख लोग अपना जीवन गुज़ारने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आम नागरिकों को निशाना बनाना युद्ध अपराध है। इस्राईल ग़ज़्ज़ा के लिए खाने पीने की चीज़ें भी नहीं जाने दे रहा है यह अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का हनन है।

अमरीका की प्रतिनिधि सभा में भी कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने इस्राईल की आलोचना की है। रशीदा तुलैब ने एक बयान जारी करके इस्राईल को एक अपारथाइड सिस्टम क़रार दिया। उन्होंने कहा कि ग़ज़्ज़ा की नाकाबंदी समाप्त होनी चाहिए हालात एसे हो गए कि फ़िलिस्तीनियों के पास प्रतिरोध के अलावा कोई रास्ता ही नहीं बचा है।

मसूरी से सांसद कोरी बुश ने कहा कि अमरीका हमास के ख़िलाफ़ जंग लड़ने के लिए ज़ायोनी शासन को मदद देना बंद करे। जंग जारी रखने के लिए ज़ायोनी शासन की मदद करने की अमरीका की नीति मानवाधिकार का उल्लंघन करती है। जो बाइडन कहते हैं कि हमास के आप्रेशन के जवाब में ज़ायोनी शासन की तरफ़ से कड़े हमले होने चाहिए लेकिन इन हमलों से आम नागरिक निशाना बन रहे हैं।

जो बाइडन ने अपने बयान में कहा था कि वो ज़ायोनी शासन को उसकी ज़रूरत के सारे हथियार देंगे।

इन हालात को देखकर लगता है कि ज़ायोनी शासन ने ख़ुद को मज़लूम ज़ाहिर करने की बड़ी कोशिशें कीं और इसके लिए बढ़ चढ़ कर झूठा प्रोपैगंडा किया किया लेकिन सच्चाई को छिपा नहीं पायी। यही वजह है कि अमरीका जैसे देशों के भीतर भी इस्राईल और फ़िलिस्तीन के बारे में लोगों की सोच बदलने लगी है।

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