इस्राईल में जारी हैं अलअक़सा तूफान के झटके
फ़िलिस्तीनियों के अलअक़सा तूफान आपरेशन के बाद से इस्राईल में इस अवैध शासन के विरुद्ध आवाज़ें तेज़ हो गई हैं।
जबसे अवैध ज़ायोनी शासन के भीतर नेतनयाहू के नेतृत्व में अतिवादी सरकार का गठन हुआ है उस समय के इस्राईल के भीतर लोगों के बहुत मतभेद पैदा हो गए हैं। यही कारण है कि वहां पर बहुत बड़ी संख्या में लोग नेतनयाहू के विरुद्ध हो गए हैं।
वे लोग पिछले कई महीनों से लगातार नेतनयाहू के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। यह मतभेद अब वहां की सेना में भीतर भी घुस गए हैं। अब इस्राईल की सेना और नेतनयाहू प्रशासन के बीच टकराव पैदा हो चुका है। हालांकि फ़िलिस्तीनियों के अलअक़सा तूफान आपरेशन के कारण कुछ समय के लिए इन मतभेदों को किनारे कर दिया गया था किंतु इस संकट से उचित ढंग से न निबटने के कारण लोग नेतनयाहू की आलोचना करने लगे हैं।
इस्राईल के यदीऊत अहारनूत समाचार पत्र के अनुसार अलअक़सा तूफान नामक फ़िलिस्तीनियों के आपरेशन की ज़िम्मेदारी नेतनयाहू द्वारा स्वीकार किये जाने को लेकर उनके मंत्रीमण्डल के तीन मंत्री अपने पद से त्यागपत्र देना चाहते हैं। 75 प्रतिशत इस्राईली इसके लिए नेतनयाहू को ज़िम्मेदार मानते हैं। तेल अवीव में हज़ारों लोगों ने प्रदर्शन करते हुए हमास को संबोधित करते हुए नारे लगा रहे थे कि वे अपने बंधकों की आज़ादी के बदले में नेतनयाहू को देने के लिए तैयार हैं।
यदीऊत अहारनूत के एक समीक्षक के अनुसार इतना सब होने के बावजूद नेतनयाहू का मेत्रीमण्डल अभी तक सचेत नहीं हुआ है। ताज़ा सर्वेक्षणों से पता चलता है कि नेतनयाहू के नेतृत्व वाली लीकुड पार्टी का जनमत बहुत तेज़ी से गिरता जा रहा है। इसी बीच अवैध ज़ायोनी शासन के युद्ध मंत्रालय के बाहर भी नेतनयाहू के विरोध में बहुत बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए जो नेतनयाहू विरोधी नारे लगा रहे थे। वे नेतनयाहू के त्यागपत्र की मांग कर रहे थे। इसके अतरिक्त ग़ज़्ज़ा पर ज़मीनी हमले में विलंब के कारण नेतनयाहू के मंत्रीमण्डल और वहां की सेना के वरिष्ट अधिकारियों के बीच खिचाव पैदा होता जा रहा है। हालांकि ज़ायोनियों को ग़ज़्ज़ा पर ज़मीनी हमले के संभावित ख़तरों का अच्छी तरह से अंदाज़ा है जिसके कारण अबतक इसमें विलंब होता आ रहा है।
इससे पहले भी सन 2014 में इस्राईल की सेना ग़ज़्ज़ा में घुस तो गई लेकिन वहां पर उसको इतना अधिक नुक़सान उठाना पड़ा जिसके कारण उसको विवश होकर ग़ज़्ज़ा से वापस आना पड़ा। इस हिसाब से ग़ज़्ज़ा का इतिहास, इस्राईल की सेना के सामने है। दूसरी ओर फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधी गुट, ग़ज़्ज़ा में इस्राईल की सेना के प्रवेश की प्रतीक्षा में बैठे हैं। उनकी इच्छा है कि इस्राईल की सेना ग़ज़्ज़ा में किसी तरह से घुसे ताकि वे उनको दाल-आंटे का भाव याद करा दें।
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