लाल सागर में तनाव को बढ़ाते, अमरीका और ब्रिटेन
सुरक्षा परिषद के सदस्यों के विरोध के बावजूद अमरीका और ब्रिटेन, लाल सागर में तनाव को लगातार बढ़ाते जा रहे हैं।
अमरीका और ब्रिटेन के युद्धक विमानों ने 14 फरवरी को यमन के पश्चिम में स्थित अलहुदैदा प्रांत में दो हमले किये।
इसी बीच संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद में रुस के स्थाई सदस्य पोल्यान्सकी ने यमन के संदर्भ में कहा है कि वर्तमान समय में क्षेत्र में संकट का मुख्य कारण, ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल के हमले हैं। उधर यमन के मामले में राष्ट्रसंघ के विशेष दूत हैंस ग्रैंडर्ग ने क्षेत्र विशेषकर लाल सागर में झड़पों के रोके जाने की मांग की है। अमरीका और ब्रिटेन यमन पर दबाव डालने के उद्देश्य से हमले कर रहे हैं जो लाल सागर से ज़ायोनी जहाज़ों को अवैध ज़ायोनी शासन जाने नहीं दे रहे हैं।
यमन की सेना ने फ़िलिस्तीनियों का समर्थन करते हुए हालिया सप्ताहों में लाल सागर से गुज़रने वाले उन जहाज़ों को रोकने का काम किया है जिनका गंतव्य अवैध ज़ायोनी शासन है। यमन की सेना ने घोषणा कर रखी है कि जबतक अवैध ज़ायोनी शासन, ग़ज़्ज़ा पर अपने हमलों को नहीं रोकता उस समय तक वह लाल सागर में ज़ायोनी जहाज़ों को लक्ष्य बनाती रहेगी। अमरीका ने अपने घटक देश ब्रिटेन के साथ मिलकर लाल सागर में तनाव बढ़ाने वाले काम शुरू कर दिये हैं जबकि इसका विरोध क्षेत्रीय देशों के अतिरिक्त बहुत से शांति के इच्छुक संगठन और व्यक्ति कर रहे हैं।
इन परिस्थतियों में यमन की सेना और वहां के जनांदोलन, अंसारुल्ला ने फैसला किया है कि वे ग़ज़्ज़ा में जारी जनसंहार को देखकर ख़ामोश नहीं बैठ सकते और वे क्षेत्र में अमरीका तथा पश्चिम के हितों को लक्ष्य बनाएंगे। अंसारुल्ला के नेता मुहम्मद अलबुख़ैती ने अमरीकी अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा है कि यमन के पास लंबी मारक क्षमता वाले मिसाइल मौजूद हैं जिनको यमन के किसी भी हिस्से से फाएर किया जा सकता है जहां से वे सटीक अपने लक्ष्य को भेदने में सक्षम रहेंगे।
प्रतिरोधक शक्तियों के बारे में अमरीकी अधिकारियों के ग़लत विचारों के बावजूद यह प्रतिरोधक शक्तियां, अमरीकी हितों को लक्ष्य बनाने के उद्देश्य से आधुनिक हथियारों और नवीनतम युद्ध शैलियों का प्रयोग कर रही हैं। इस बार अमरीका और ब्रिटेन की युद्धोंनमादी नीतियों को क्षेत्र के प्रतिरोधक गुटों की ओर से मुंहतोड़ जवाब मिल रहा है। क्षेत्र के हालिया परिवर्तन दर्शाते हैं कि पश्चिम की युद्ध भड़काने वाली कार्यवाहियों को इस बार उचित जवाब मिल रहा है और अब अमरीकी सैन्य छावनियां प्रतिरोधकर्ताओं की पहुंच में हैं।
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