फ़िलिस्तीनी पत्रकारों की गिरफ़्तारी: इस्राइली सेना द्वारा दबाव
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पार्स टुडे – वर्ष 2025 में इस्राइली सेना ने कम से कम 42 फ़िलिस्तीनी पत्रकारों को गिरफ्तार किया।
(last modified 2026-01-03T10:25:59+00:00 )
Jan ०३, २०२६ १५:५४ Asia/Kolkata
  • ज़ायोनी शासन द्वारा मीडिया दबाव जारी, वर्ष 2025 में 42 फ़िलिस्तीनी पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया
    ज़ायोनी शासन द्वारा मीडिया दबाव जारी, वर्ष 2025 में 42 फ़िलिस्तीनी पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया

पार्स टुडे – वर्ष 2025 में इस्राइली सेना ने कम से कम 42 फ़िलिस्तीनी पत्रकारों को गिरफ्तार किया।

फ़िलिस्तीन पत्रकार संघ की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कब्ज़ाधारी इस्राइली सेना ने वेस्ट बैंक, यरूशलेम और 1948 के अवैध अधिकृत इलाक़ों में कम से कम 42 फ़िलिस्तीनी पत्रकारों, जिनमें आठ महिला पत्रकार शामिल हैं, को गिरफ्तार किया। पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इस पेशेवर संगठन ने कहा कि कब्ज़ाधारी अधिकारी पत्रकारों के खिलाफ़ संगठित प्रतिकार नीति जारी रखे हुए हैं इस नीति में मनमाने और प्रशासनिक गिरफ्तारी, मारपीट, निर्वासन, मीडिया उपकरणों की ज़ब्ती और ज़बरदस्ती पूछताछ शामिल है जिसका उद्देश्य पत्रकारिता को दबाना और राष्ट्रीय मीडिया संरचना को कमजोर करना है।

 

रिपोर्ट में गिरफ्तारी के पैटर्न में खतरनाक बदलाव का भी उल्लेख किया गया है जैसे कि प्रभावशाली पत्रकारों पर ध्यान केंद्रित करना, एक ही पत्रकार को बार-बार गिरफ्तार करना, बिना आरोप बताए प्रशासनिक गिरफ्तारी का विस्तार और शारीरिक व मानसिक हिंसा को निवारक उपाय के रूप में इस्तेमाल करना।

 

रिपोर्ट में दर्ज कई मामलों में पत्रकारों को क्षेत्रीय मिशन और छापों की कवरेज के दौरान गिरफ्तार किया गया फ़िलिस्तीन पत्रकार संघ के अनुसार यह गवाहों को मैदान से हटाने का प्रयास है। इसके अलावा पत्रकारों के घरों पर छापे और उनके परिवारों के सामने गिरफ्तारी की घटनाओं में वृद्धि का भी उल्लेख है यह तरीका पत्रकारों की मानसिक और सामाजिक स्थिति को तोड़ने के उद्देश्य से अपनाया जाता है।

 

इस संघ ने प्रशासनिक गिरफ्तारी को सबसे खतरनाक दमन का रूप बताया और इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन क़रार दिया।

 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मारपीट, ज़मीन पर खींचना, हथियार से धमकाना और उपकरणों की जब्ती बिना वापस किए यह सब पत्रकारों की पेशेवर क्षमता को नष्ट करने के लिए किया गया।

 

अंत में इस पेशेवर संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से तत्काल हस्तक्षेप करने और फ़िलिस्तीनी पत्रकारों के खिलाफ़ अपराध करने वाले तथा उन्हें आदेश देने वालों को जवाबदेह ठहराने और मुक़दमा चलाने का आग्रह किया।

 

इस्राइली कब्ज़ाधारी 7 अक्टूबर 2023 से ग़ज़्ज़ा में नरसंहार युद्ध की शुरुआत से ही पत्रकारों और रिपोर्टरों को लगातार निशाना बना रहे हैं।

 

ग़ज़्ज़ा में असमान युद्ध के दौरान पत्रकारों, मानवाधिकार संगठनों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने इस्राइली सैनिकों द्वारा पत्रकारों को लक्षित करने और उन पर हमलों को रोकने के लिए कड़े क़दम उठाने की मांग की लेकिन यह अपराधी शासन इन अनुरोधों की अनदेखी करता हुआ लगातार पत्रकारों और सूचना केंद्रों को निशाना बना रहा है। mm