ज़ायोनी शासन की जेलों में क्या हो रहा है ?
https://parstoday.ir/hi/news/west_asia-i142370-ज़ायोनी_शासन_की_जेलों_में_क्या_हो_रहा_है
पार्स टुडे- फ़िलिस्तीनी बंदियों और रिहा किए गए कैदियों के मामलों के प्रमुख ने कहा है कि इज़राइली शासन की जेलों में पूर्ण रूप से युद्ध अपराध हो रहे हैं।
(last modified 2026-01-19T09:36:09+00:00 )
Jan १६, २०२६ १५:०७ Asia/Kolkata
  • इज़राइली क़ैद में फ़िलिस्तीनी बंदी
    इज़राइली क़ैद में फ़िलिस्तीनी बंदी

पार्स टुडे- फ़िलिस्तीनी बंदियों और रिहा किए गए कैदियों के मामलों के प्रमुख ने कहा है कि इज़राइली शासन की जेलों में पूर्ण रूप से युद्ध अपराध हो रहे हैं।

फ़िलिस्तीनी बंदियों और रिहा किए गए कैदियों के मामलों के प्रमुख ने ज़ायोनी कैद में फ़िलिस्तीनी बंदियों की शहादत को एक खतरनाक संकेत बताया।

 

पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार फ़िलिस्तीनी बंदियों और रिहा किए गए कैदियों के मामलों के प्रमुख राएद अबू अल-हुम्स ने कहा: इज़राइली जेलों में बंद फ़िलिस्तीनी कैदी अब भी योजनाबद्ध नीतियों के निशाने पर हैं जो उनकी जान को लक्ष्य बनाती हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब कब्ज़ाधारियों द्वारा लगातार हत्याएँ और फाँसी जैसी कार्रवाइयाँ की जा रही हैं, जो स्पष्ट रूप से सभी अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और संधियों का उल्लंघन हैं।

 

अबू अल-हुम्स ने ज़ायोनी शासन की जेलों में बंद फ़िलिस्तीनी कैदी हमज़ा अदवान की शहादत का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले 27 महीनों में शहीद हुए फ़िलिस्तीनी बंदियों की संख्या 87 तक पहुँच गई है।

 

उन्होंने आगे कहा: वर्ष 1967 से अब तक इज़राइली जेलों में शहीद हुए फ़िलिस्तीनी बंदियों की कुल संख्या 324 हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ़िलिस्तीनी बंदी हमज़ा अदवान की शहादत पिछले सितंबर में हुई थी लेकिन इज़राइली कब्ज़ाधारी अधिकारियों ने हाल ही में ही उसकी मृत्यु की पुष्टि की है।

 

अबू अल-हुम्स ने इस देरी को एक खतरनाक और चिंताजनक संकेत बताया जो जेलों के भीतर सच्चाई को जानबूझकर छिपाने और बंदियों के भविष्य से छेड़छाड़ करने की नीति को दर्शाता है।

 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा: कब्ज़ाधारी अधिकारियों द्वारा राजनीतिक फ़ैसलों के ज़रिये कैदियों को जबरन ग़ायब करने की निरंतर नीति को देखते हुए संभव है कि बड़ी संख्या में कैदी मारपीट, यातना और जानबूझकर की गई चिकित्सकीय लापरवाही के कारण अपनी जान गँवा चुके हों।

 

उन्होंने कहा कि यह नीति कैदियों के परिवारों को उनके प्रियजनों के हालात जानने से वंचित करती है और यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने जोड़ा: कब्ज़ाधारियों की जेलों में जो कुछ हो रहा है, वह पूर्ण रूप से युद्ध अपराध हैं।

 

फ़िलिस्तीनी बंदियों और रिहा किए गए कैदियों के मामलों के प्रमुख ने अंतरराष्ट्रीय और मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे अपनी कानूनी और मानवीय ज़िम्मेदारियों को निभाएँ और फ़िलिस्तीनी बंदियों, चाहे महिलाएँ हों या पुरुष, के ख़िलाफ़ किए जा रहे इन उल्लंघनों को तुरंत रोकने तथा कब्ज़ाधारियों को उनके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए त्वरित कार्रवाई करें। mm