ईरान की ख़ैबरशीक़न मिसाइलें
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पार्स टुडे – यूरोपीय काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स (ECFR) नामक थिंक टैंक ने अमेरिका की ईरान में सैन्य हस्तक्षेप की संभावित परिणामों के बारे में चेतावनी दी है।
(last modified 2026-01-31T13:24:57+00:00 )
Jan ३१, २०२६ १८:५३ Asia/Kolkata
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    ईरान की ख़ैबरशीक़न मिसाइलें

पार्स टुडे – यूरोपीय काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स (ECFR) नामक थिंक टैंक ने अमेरिका की ईरान में सैन्य हस्तक्षेप की संभावित परिणामों के बारे में चेतावनी दी है।

ब्रेलिन स्थित इस थिंक टैंक ने कहा कि 1979 के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति हमेशा इस सवाल का सामना कर रहे हैं कि क्या इस्लामी गणराज्य ईरान को सैन्य शक्ति के जरिए गिराया जा सकता है या नहीं।

 

हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि मदद आ रही है लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य अभी स्पष्ट नहीं है। दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोधों के दौरान ट्रम्प ने कई बार ईरान को सैन्य धमकी दी और साथ ही कूटनीति की संभावना भी बरकरार रखी। हाल ही में अमेरिकी युद्धक विमान और नौसैनिक जहाज़ पश्चिम एशिया में प्रवेश कर चुके हैं।

 

थिंक टैंक ने अफगानिस्तान, इराक, लीबिया और सीरिया के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोप को पश्चिम के प्रभाव की सीमाओं और ईरान के साथ लंबी लड़ाई के खतरों के प्रति वास्तविक होना चाहिए। मुख्य चिंताओं में अनपेक्षित परिणाम शामिल हैं। अगर अमेरिका व्यापक हमले शुरू करता है और संभावित रूप से शासन बदलने का लक्ष्य रखता है, तो तेहरान क्षेत्र में अमेरिकी बलों को निशाना बनाकर इस कार्रवाई की राजनीतिक लागत बढ़ा सकता है।

 

ईरानी सेना तेल सुविधाओं पर हमला कर सकती है और हॉर्मूज़ जलसंधि में नौवहन को बाधित कर सकती है इससे वैश्विक ऊर्जा और वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के नेटवर्क को सक्रिय करके अमेरिका के सहयोगियों, जिनमें इज़राइल शामिल है, पर समन्वित हमले कर सकता है।

 

ECFR की रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2025 के 12-दिवसीय युद्ध में ईरान ने इन साधनों का उपयोग नहीं किया, लेकिन अगर उसे अस्तित्वगत खतरा महसूस हुआ तो वह अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही ईरान किसी क्षेत्रीय संघर्ष में नुकसान उठाए ट्रम्प शायद ही अपनी इच्छित निर्णायक सफलता प्राप्त कर पाएंगे। इस संस्थान ने चेतावनी दी कि पिछले दो दशकों में अमेरिका का सैन्य हस्तक्षेप आमतौर पर रक्तस्राव, अस्थिरता और अर्थव्यवस्थाओं की कमजोरियों के साथ समाप्त हुआ है। लीबिया और सीरिया के उदाहरण दिए गए हैं, जहां विदेशी हस्तक्षेप ने विभाजन और बड़े पैमाने पर यूरोप की ओर पलायन पैदा किया।

 

रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि ईरान में संभावित युद्ध और कठिन होगा। 12-दिवसीय युद्ध में क्षति के बावजूद ईरान की सैन्य मशीन अभी भी संगठित है और कुछ सुरक्षा निकाय विदेशी समर्थन से शासन बदलने की कोशिश को जिहाद मानते हैं। इसके अलावा ईरान की विशाल भौगोलिक सीमा और 90 मिलियन से अधिक की आबादी इसे एक ऐसा देश बनाती है, जिसे तोड़ना बहुत कठिन है और अमेरिका या नाटो को ईरान में शासन परिवर्तन के लिए इराक और लीबिया के मामलों की तुलना में कहीं अधिक चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

 

अंत में रिपोर्ट में कहा गया है कि तनाव के बावजूद, क्षेत्रीय अरब देश और तुर्की ने अमेरिका के ईरान में सैन्य हस्तक्षेप के बारे में गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट यह भी तर्क देती है कि ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों पर लक्षित हमलों के जरिए 12-दिवसीय युद्ध जैसी योजना निष्पादित करने का विचार भ्रामक है। जून 2025 में ट्रम्प ने इज़राइल के प्रभाव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमले किए और अब मानवाधिकारों के बहाने हमले की बढ़ती मांगों का सामना कर रहे हैं यह प्रक्रिया उन्हें ईरान के साथ अनंत सैन्य संघर्ष के चक्र में प्रवेश करवा सकती है। mm