हिजबुल्लाह: ईरान ने 'मैदानों की एकता' का समीकरण स्थापित कर दिया
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पार्स टुडे – हिजबुल्लाह के प्रतिनिधि ने ईरान द्वारा 'मैदानों की एकता' के समीकरण को स्थापित किए जाने पर जोर देते हुए कहा कि वे अपने सभी सिद्धांतों और विकल्पों पर कायम हैं।
(last modified 2026-06-11T12:03:39+00:00 )
Jun ११, २०२६ १७:३१ Asia/Kolkata
  • लेबनानी संसद में 'प्रतिरोध के प्रति निष्ठा' गुट के सदस्य अली फ़य्याज़
    लेबनानी संसद में 'प्रतिरोध के प्रति निष्ठा' गुट के सदस्य अली फ़य्याज़

पार्स टुडे – हिजबुल्लाह के प्रतिनिधि ने ईरान द्वारा 'मैदानों की एकता' के समीकरण को स्थापित किए जाने पर जोर देते हुए कहा कि वे अपने सभी सिद्धांतों और विकल्पों पर कायम हैं।

पार्स टुडे के अनुसार लेबनानी संसद में 'प्रतिरोध के प्रति निष्ठा' गुट के सदस्य अली फैयाज़ ने लेबनान के हालिया घटनाक्रम और ज़ायोनी दुश्मन के साथ जारी लड़ाई के बारे में अपने बयान में घोषणा किया कि बेरूत के दक्षिणी उपनगर में प्रतिरोध समुदाय क्षेत्र में प्रतिरोध के अन्य मोर्चों के साथ समन्वित है।

 

अली फ़य्याज़ ने अल-मयादीन चैनल के साथ बातचीत में लेबनान की कठपुतली सरकार और ज़ायोनी दुश्मन के बीच वार्ता तथा उनके बीच समझौते के संबंध में कहा कि कोई भी पहल जो व्यापक युद्धविराम के साथ शुरू नहीं होती और कब्जाधारियों को लेबनान में स्वतंत्र रूप से आने-जाने से नहीं रोकती, अर्थहीन है।

 

उन्होंने कहा: "तथ्य बताते हैं कि कोई भी प्रस्तावित समाधान में प्रतिरोध को नजरअंदाज नहीं कर सकता और यह प्रतिरोध ही है जिसके पास दक्षिण के संबंध में निर्णायक शक्ति है।"

 

अली फैयाज़ ने लेबनान सरकार के ज़ायोनी दुश्मन के साथ सहयोग के देशद्रोही कार्यों के बारे में कहा कि लेबनानी अधिकारी देश की राजनीतिक स्थिति को कमजोर करने और नाजुक आंतरिक संतुलन को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं, और यह आंतरिक स्थिति को टकराव की ओर ले जा रहा है जिससे बचा जाना चाहिए।

 

लेबनानी संसद के इस सदस्य ने स्पष्ट किया कि लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन अमेरिकी दबाव और साजिशों के तहत सत्ता में आए, और जब से वे राष्ट्रपति पद पर हैं उन्होंने लेबनान पर महंगे राजनीतिक विकल्प थोप दिए हैं।

 

"ईरान ने 'मैदानों की एकता' का समीकरण स्थापित कर दिया"

 

क्षेत्रीय स्तर पर प्रतिरोध गुट के इस सदस्य ने कहा कि क्षेत्र एक नई वास्तविकता का सामना कर रहा है क्योंकि समीकरणों को बदलने के लिए अमेरिका की क्षमता की सीमाएँ उजागर हो गई हैं और अमेरिकियों के पास अब ईरान के साथ समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। ईरान के प्रतिरोध और बेरूत के दक्षिणी उपनगर की रक्षा के मैदान में प्रत्यक्ष प्रवेश ने प्रतिरोध के सभी मोर्चों की एकता और अखंडता की पुष्टि कर दी। mm