यमन: ईरान में शादी समारोह पर अमेरिकी हमला – पूर्ण युद्ध अपराध
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पार्स टुडे – यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने – दक्षिणी ईरान के सिरिक में एक शादी समारोह पर अमेरिकी आतंकवादियों के युद्ध अपराध की कड़ी निंदा की है।
(last modified 2026-09-02T10:05:01+00:00 )
Sep ०२, २०२६ १५:३३ Asia/Kolkata
  • दक्षिणी ईरान के एक गाँव पर अमेरिकी हमला
    दक्षिणी ईरान के एक गाँव पर अमेरिकी हमला

पार्स टुडे – यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने – दक्षिणी ईरान के सिरिक में एक शादी समारोह पर अमेरिकी आतंकवादियों के युद्ध अपराध की कड़ी निंदा की है।

पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के दक्षिणी होर्मुज़गान प्रांत के सिरिक शहर में एक शादी समारोह को निशाना बनाने वाले अमेरिकी मानवता-विरोधी अपराध पर प्रतिक्रियाओं की निरंतरता में – यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक बयान जारी कर कहा:"हम – अमेरिकी दुश्मन के जघन्य अपराध की कड़ी निंदा करते हैं – जिसमें उसने ईरान में एक शादी समारोह पर हमला किया – जिसके परिणामस्वरूप दर्जनों निर्दोष नागरिक शहीद और घायल हो गए।"

यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा:"यह जघन्य हमला – एक पूर्ण युद्ध अपराध है – और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और चार जिनेवा कन्वेंशनों का स्पष्ट उल्लंघन है – जो नागरिक लक्ष्यों और सुरक्षित आवासीय क्षेत्रों को निशाना बनाने को एक अपराध मानते हैं।"

बयान में आगे कहा गया है:"यमन का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग – अमेरिकी विश्वासघाती और आपराधिक आक्रमण की कड़ी निंदा करता है – और अमेरिकी आतंकवादी सरकार को – निर्दोष रक्त बहाने और नागरिकों के बीच आतंक फैलाने के लिए जिम्मेदार मानता है।"

यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने – इस अपराध की तत्काल और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच – और इसके अपराधियों को अंतरराष्ट्रीय अदालतों में मुकदमा और सजा देने का आह्वान किया – और इसे मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और युद्ध अपराध बताया – जो किसी भी सीमा अवधि (मुरूर-ए-ज़मान) के अधीन नहीं है।

इस यमनी निकाय ने इस बात पर ज़ोर दिया:**"इन निर्दोष ईरानी नागरिकों का रक्त – कभी व्यर्थ नहीं जाएगा – और यह उन सभी के माथे पर शर्म के धब्बे के रूप में बना रहेगा, जिन्होंने इस आक्रमण में भाग लिया, उसे सही ठहराया, या उसके सामने मौन रहे।"

यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने – राष्ट्रों के अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करने के अधिकार पर ज़ोर देते हुए – स्पष्ट किया:"नागरिकों को किसी भी बहाने से व्यवस्थित रूप से निशाना बनाना – बिल्कुल भी उचित नहीं है – और हम अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार परिषद से आग्रह करते हैं कि वे अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएँ – अपनी दोहरी-मानक नीतियों को त्यागें – और इस आक्रमण की निंदा करते हुए और इसकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए एक स्पष्ट बयान जारी करें।" (AK)

 

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