क़दूमी: अल-अक़्सा तूफ़ान ने क्षेत्र के समीकरण बदल दिए
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पार्सटुडे – तेहरान में फ़िलिस्तीनी इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के प्रतिनिधि ने अल-अक़्सा तूफ़ान अभियान को एक अनिवार्यता बताया जिसने क्षेत्र के समीकरण बदल दिए।
(last modified 2026-10-07T07:59:05+00:00 )
Oct ०७, २०२६ १३:२५ Asia/Kolkata
  • "खालिद क़दूमी", फ़िलिस्तीनी इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के प्रतिनिधि

पार्सटुडे – तेहरान में फ़िलिस्तीनी इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के प्रतिनिधि ने अल-अक़्सा तूफ़ान अभियान को एक अनिवार्यता बताया जिसने क्षेत्र के समीकरण बदल दिए।

वर्षों के क़ब्जे, बस्ती निर्माण, अल-अक्सा मस्जिद पर अतिक्रमण, गाजा की नाकाबंदी, फ़िलिस्तीनियों की गिरफ्तारी और हत्या तथा एक राष्ट्र के अधिकारों के प्रति दुनिया की उपेक्षा ने अंततः लोगों के धैर्य को समाप्त कर दिया।

 

क़दूमी ने कहा कि 7 अक्टूबर इसराइल के लिए एक रणनीतिक हार थी और इसके विपरीत, फ़िलिस्तीनियों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत मानी जाती है, क्योंकि फ़िलिस्तीनी शासन की बाधाओं और सुरक्षा बाड़ों को पार करने और कब्जे वाली भूमि में प्रवेश करने में सफल रहे। यदि उनके पास अधिक साधन और समर्थन होता और विश्व समुदाय उन्हें अकेला न छोड़ता, तो वे अधिक सैन्य उपलब्धियाँ भी प्राप्त कर सकते थे।

 

उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीनी बड़ी संख्या में इसराइलियों, जिनमें सैनिक, बस्तियों के निवासी और सशस्त्र व्यक्ति शामिल थे, को बंदी बनाकर अपने कुछ कैदियों को इसराइली जेलों से रिहा कराने में भी सफल रहे।

 

क़दूमी ने कहा कि 7 अक्टूबर ने दिखाया कि इसराइल तैयार नहीं था और फ़िलिस्तीनी उसे आश्चर्यचकित करने में सफल रहे। सबसे महत्वपूर्ण बात, फ़िलिस्तीनियों ने साबित कर दिया कि गंभीर भौगोलिक और सैन्य प्रतिबंधों के बावजूद, इसराइल को हराया जा सकता है। अर्थात वह सिद्धांत जो कहता था कि इसराइल अजेय है, व्यवहार में टूट गया।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि फ़िलिस्तीन में इस्लामी प्रतिरोध, नाकाबंदी और सीमित साधनों के बावजूद अपने आदर्श की सत्यता और न्याय में विश्वास के आधार पर तथा अपने द्वारा जुटाए गए साधनों से ऐसा अभियान चलाने में सक्षम रहा।

 

क़दूमी ने कहा कि दूसरी ओर 7 अक्टूबर ने फ़िलिस्तीनी मुद्दे को फिर से अंतरराष्ट्रीय मंचों तथा मानवाधिकार और कानूनी संस्थानों के ध्यान के केंद्र में ला दिया। आज कोई भी फ़िलिस्तीनी लोगों और फ़िलिस्तीनी मुद्दे को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।

 

उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर ने यहाँ तक कि क्षेत्र के समीकरण भी बदल दिए। इसने दिखाया कि इसराइल के साथ संबंध जरूरी नहीं कि एक विशेषाधिकार या मुक्ति का मार्ग हो, बल्कि कई देशों के लिए यह एक जटिल राजनीतिक और यहाँ तक कि नैतिक मुद्दा बन गया है। mm