ग़ज़्ज़ा के परिवेष्टन के परिणामों पर चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव ने ग़ज़्ज़ा के लाखों लोगों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन के दबाव और धमकियों में वृद्धि की ओर से सचेत करते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया के जारी रहने से क्षेत्र में हिंसा व अशांति में कमी की कोई आशा नहीं है।
बान की मून ने फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन की शत्रुतापूर्ण नीतियों की एेसी स्थिति में आलोचना की है जब इस्राईली प्रधानमंत्री ने ग़ज़्ज़ा का परिवेष्टन समाप्त करने की अंतर्राष्ट्रीय मांग को एक बार फिर रद्द करते हुए कहा है कि इस्राईल का इस प्रकार का कोई कार्यक्रम नहीं है। ज़ायोनी शासन की इस हठधर्मी के मुक़ाबले में बान की मून ने दस साल से जारी ग़ज़्ज़ा के अत्याचारपूर्ण घेराव को समाप्त करने पर एेसी स्थिति में बल दिया है कि रमज़ान के पवित्र महीने के आरंभ से ज़ायोनी शासन ने मिस्र के सहयोग से लगभग बीस लाख की आबादी वाले शहर ग़ज़्ज़ा का परिवेष्टन अधिक कड़ा कर दिया है।
यह एेसी स्थिति में है कि जब दो साल पहले के ग़ज़्ज़ा युद्ध में तबाह होने वाले इस शहर के पुनिर्निर्माण के संबंध में विश्व समुदाय ने मदद के जो वादे किए थे वे भी पूरे नहीं हुए हैं और इस नगर का घेराव जारी रहने के कारण पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अधर में पड़ी हुई है। यही कारण है कि फ़िलिस्तीनी जनता और अधिकारियों का मानना है कि ज़ायोनी शासन, ग़ज़्ज़ा के परिवेष्टन को कड़ा करके इस नगर में नागरिक अवज्ञा भड़काना चाहता है लेकिन पिछले दस साल में फ़िलिस्तीनी जनता द्वारा प्रतिरोध के समर्थन और ज़ायोनियों के अतिग्रहण के मुक़ाबले ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह कभी भी इस प्रकार के दबाव के सामने घुटने नहीं टेकेगी और प्रतिरोध का समर्थन जारी रखेगी। (HN)