बहरैन में जनता के विरुद्ध आले ख़लीफ़ा की हिंसा में वृद्धि
बहरैन की आले ख़लीफ़ा सरकार ने हालिया दिनों में राजनैतिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी का व्यापक सिलसिला शुरू कर दिया है और साथ ही राजनैतिक बंदियों को दी जाने वाली यातनाओं में वृद्धि कर दी है जिससे इस देश में मानवाधिकार के घोर उल्लंघन की चिंता उत्पन्न हो गई है।
इसी परिप्रेक्ष्य में बहरैन के विख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता नबील रजब को उनकी चिंताजनक शारीरिक स्थिति के कारण आले ख़लीफ़ के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इससे पहले तक उन्हें जेल की काल कोठरी में रखा गया था। बहरैन की तानाशाही सरकार ने पिछले हफ़्ते अपनी दमनकारी नीतियों को आगे बढ़ाते हुए देश के सबसे प्रमुख राजनैतिक दल अलवेफ़ाक़ की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था, इस दल के प्रमुख शैख़ अली सलमान की क़ैद की सज़ा में वृद्धि कर दी थी, नबील रजब को गिरफ़्तार किया था और देश की अनेक मस्जिदों में जुम व जमाअत की नमाज़ पर प्रतिबंध लगा दिया। आले ख़लीफ़ा शासन ने इसी तरह बहरैनी जनता के आंदोलन के धार्मिक व आध्यात्मिक नेता शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता भी रद्द कर दी है।
राजनैतिक कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ आले ख़लीफ़ सरकार के ये अत्याचारपूर्ण आदेश एेसी स्थिति में सामने आए हैं कि कुछ ही दिन पहले अरब लीग ने बहरैन को अरब मानवाधिकार न्यायालय का मुख्यालय घोषित करने का हास्यास्पद क़दम उठाया है। बहरैन में नागरिक स्वतंत्रता व अधिकारों का पहले से अधिक हनन और जनता के नेताओं की नागरिकता रद्द करने की कार्यवाही, सरकार विरोधियों की ओर से हिंसक व्यवहार का मार्ग प्रशस्त करेगी और साथ ही इससे संसार के समक्ष आले ख़लीफ़ा की हक़ीक़त एक बार फिर खुल कर सामने आ गई है। इन परिस्थितियों में दमनकारी आले ख़लीफ़ा के मुक़ाबले में विश्व समुदाय की ढिलाई, बहरैनी जनता के लिए अधिक ख़तरनाक स्थिति पैदा कर देगी। (HN)