कुवैत को भी बजट घाटे का सामना
तेल की आय पर निर्भर कुवैत को भी बजट के घाटे का सामना है।
कुवैत के वित्तमंत्री का कहना है कि देश को सन 2015-2016 में अरबों डॉलर के बजट घाटे का सामना करना पड़ रहा है। अनस अस्सालेह ने बताया कि कुवैत को सन 2015-2016 में 18.5 अरब डालर के घाटे का समाना रहा। उन्होंने कहा कि इस बात की संभावना पाई जाती है कि यह बजट घाटा बढ़कर 28 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
कुवैत के वित्तमंत्री ने कहा कि बजट घाटे को देखते हुए सरकार 10 अरब डॉलर क़र्ज लेने पर मजबूर है।
ज्ञात रहे कि तेल के घटते मूल्य ने कुवैत सहित फ़ार्स की खाड़ी के देशों की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाले हैं। वर्तमान समय में फ़ार्स की खाड़ी के देश जिस आर्थिक संकट से गुज़र रहे हैं उसका मुख्य कारण सऊदी अरब की वह नीति है जिसके अन्तर्गत उसने सन 2014 में तेल के मूल्य कम किये थे।
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब ने ईरान की अर्थव्यवस्था को क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से तेल के मूल्य को 100 डालर प्रति बैरेल से 40 डालर पहुंचा दिया किंतु इसका परिणाम उल्टा निकला। इस नीति के कारण अब स्वयं सऊदी अरब और फ़ार्स की खाड़ी के अन्य अरब देश, आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।