क्या तुर्की का विद्रोह ड्रामा था?
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तुर्की में हालिया "विद्रोह" और उसकी "नाकामी" के बाद पूरी दुनिया में अलग- अलग विचार प्रकट किये जा रहे हैं लेकिन सब से खतरनाक विचार यह आशंका है कि यह पूरा सैन्य विद्रोह बनावटी और दिखावटी था और इसे तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान के मज़बूत करने के लिए तैयार किया गया था।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul १७, २०१६ १६:०५ Asia/Kolkata
  • क्या तुर्की का विद्रोह ड्रामा था?

तुर्की में हालिया "विद्रोह" और उसकी "नाकामी" के बाद पूरी दुनिया में अलग- अलग विचार प्रकट किये जा रहे हैं लेकिन सब से खतरनाक विचार यह आशंका है कि यह पूरा सैन्य विद्रोह बनावटी और दिखावटी था और इसे तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान के मज़बूत करने के लिए तैयार किया गया था।

फिलहाल तो कुछ भी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता लेकिन कुछ सवाल हैं जिनकी वजह से बहुत से लोगों के मन में इस प्रकार के विचार आ रहे हैं।

दरअस्ल सैनिक विद्रोह की भी कुछ विशेषताएं होती हैं जिनके बिना उसे सैनिक विद्रोह नहीं कहा जा सकता है।

 

सब से पहली बात तो यह है कि किसी भी सैनिक विद्रोह के लिए विद्रोहियों का एक नेता होना ज़रूरी होता है जो विद्रोह के समय विद्रोही सैनिकों का नेतृत्व करता है लेकिन तुर्की के "सैन्य विद्रोह" में विद्रोहियों के नेता का कहीं पता नहीं था और अब तक जिन लोगों के नाम लिये जा रहे हैं वह सब कुछ अनुमान के आधार पर है। यहां तक कि बहुत से विद्रोही सैनिकों को ही विद्रोह के बारे में पता नहीं था और वह समझ रहे थे कि पुल को बंद करने का उन्हें जो आदेश मिला है वह दरअस्ल युद्धाभ्यास का हिस्सा है।

        सचमुच के विद्रोह में , विद्रोह करने वाले, सब से पहले शासक और सरकार के सब से बड़े अधिकारी  को गिरफ्तार करते हैं लेकिन तुर्की के विद्रोह में राष्ट्रपति अर्दोगान की तो बात ही नहीं बल्कि उनके मंत्रिमंडल का एक मंत्री भी न पकड़ा गया और न ही विद्रोहियों ने किसी मंत्री की हत्या की केवल सेनाध्यक्ष को कुछ घंटों के लिए बंधक बनाया गया।

        किसी भी देश में सेना द्वारा विद्रोह के तत्काल बाद, संपर्क साधन बंद कर दिये जाते हैं लेकिन तुर्की में कोई भी संपर्क सेवा बंद नहीं की गयी!  सेल फोन और इन्टरनेट चल रहे थे बल्कि तुर्की के राष्ट्रपति ने जिनके विरुद्ध सैनिकों ने विद्रोह किया था, " फेस टाइम " से लाइव भाषण दिया और लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की।

मुहम्मद फत्हुल्लाह गोलन

 

        किसी भी देश में सैनिक विद्रोह होता है तो  राजधानी पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश की जाती है लेकिन तुर्की में " विद्रोही सैनिकों " ने विद्रोह के लिए इस्तांबूल नगर को चुना जो तुर्की का सब से अधिक इस्लामी शहर है और जहां राष्ट्रपति अर्दोगान के सब से अधिक समर्थक रहते हैं  और खुद अर्दोगान इस नगर में प्रायः जुमा की नमाज़ पढ़ने जाते हैं।

        बहुत से लोगों को इस बात पर हैरत है कि " विद्रोही सैनिकों " ने अर्दोगान के खिलाफ विद्रोह उस नगर से क्यों शुरु किया जहां उनके सब से अधिक समर्थक रहते हैं? और फिर जब सैनिकों ने संसद भवन और राष्ट्रपति भवन पर हमला किया तो इन इमारतों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और विशेषकर राष्ट्रपति भवन पर " विद्रोही  सैनिकों " द्वारा फायर किया गया मिसाइल, राष्ट्रपति भवन से दूर एक सड़क पर लगा।

        तुर्की में " सैनिक विद्रोह " की विफलता के बाद जिस तरह से अर्दोगान की सरकार ने " विद्रोहियों" के खिलाफ कार्यवाही की घोषणा की उस पर गौर करने से यह महसूस होता है कि इन " विद्रोहियों " की लिस्ट मानो उनके पास पहले से ही तैयार रखी थी यही वजह है कि बहुत से लोग तुर्की के इस सैनिक विद्रोह को अपने विरोधियों के विरुद्ध अर्दोगान का " विद्रोह " भी कह रहे हैं।      

तुर्की की सरकार ने विद्रोहियों की यह लिस्ट जारी की है

 तुर्की में इस " सैनिक विद्रोह " का ज़िम्मेदार मुहम्मद फत्हुल्लाह गोलन को बताया जा रहा है जबकि गोलन ने विद्रोह शुरु होते ही उसकी आलोचना की थी और उससे खुद को अलग कर लिया था अगर उनका विद्रोह में हाथ होता तो आरंभ में खामोश रहते क्योंकि इस तरह से तो उनके " समर्थकों" का मनोबल ही गिरा विद्रोह के नेता की ओर से इस प्रकार का बयान विद्रोह की विफलता का कारण बनता है और फिर यह भी एक ठोस हक़ीक़त है कि गोलन, इस्लावादी नेता हैं और तुर्की की सेना धर्म विरोधी है जहां धर्म और धार्मिक नेताओं का कोई स्थान नहीं।

       बहरहाल अगर तुर्की के सैनिक विद्रोह के बनावटी और ड्रामा होने का ख्याल सही है तो इससे ज़्यादा अफसोस की और कोई बात नहीं हो सकती क्योंकि इस सूरत में इस राजनीतिक खेल के लिए सैंकड़ों बेगुनाहों की बलि चढ़ा दी गयी।

राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान, तुर्की की सब से शक्तिशाली हस्ती

 

        कुछ लोग बेहिचक यह कह रहे हैं कि तुर्की का सैनिक विद्रोह, अर्दोगान को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए उनके समर्थकों की ओर तैयार किया गया एक "ड्रामा" था  ताकि इस तरह से अर्दोगान अपने विरोधियों का "सफाया" कर सकें।

        वैसे कुछ लोगों का यह भी मानना है कि खुद अर्दोगान को इस " विद्रोह" की खबर थी अब सच्चाई को धीरे-धीरे खुल कर सामने आएगी तभी सब कुछ पता चलेगा फिलहाल तो हमें यह पता है कि आज से तीन महीने पहले वाशिंग्टन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में तुर्की के सांसद " ईकान इर्दमीर" के हवाले से लिखा था कि तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान देश में सैनिक विद्रोह का ड्रामा करने वाले हैं! (Q.A.)

(लेखक के निजी विचार हैं, पार्स टूडे का सहमत होना ज़रूरी नहीं। )