अर्दोग़ान ओबामा वार्ता, रूसी इंटेलीजेन्स का कारनामा, तुर्की सऊदी तनाव
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अमरीकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने अपने तुर्क समकक्ष रजब तैयब अर्दोग़ान से फ़ोन पर बात करके उन्हें पिछले हफ़्ते की विफल सैनिक बग़ावत की जांच में सहयोग देने का आश्वासन दिलया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul २०, २०१६ ०५:२४ Asia/Kolkata
  • अर्दोग़ान ओबामा वार्ता, रूसी इंटेलीजेन्स का कारनामा, तुर्की सऊदी तनाव

अमरीकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने अपने तुर्क समकक्ष रजब तैयब अर्दोग़ान से फ़ोन पर बात करके उन्हें पिछले हफ़्ते की विफल सैनिक बग़ावत की जांच में सहयोग देने का आश्वासन दिलया।

वाइट हाउस के प्रवक्ता जाश अर्नेस्ट ने कहा कि दोनों नेताओं ने अमरीका में रह रहे तुर्क धार्मिक नेता फ़त्हुल्ला गूलन के प्रत्यपर्ण के बारे में भी बातचीत की। तुर्की की सरकार गूलन को सैनिक विद्रोह का ज़िम्मेदार मानती है जबकि गूलन इस आरोप को अस्वीकार करते हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि गूलन के प्रत्यर्पण की किसी भी मांग पर द्विपक्षीय समझौते के तहत विचार किया जाएगा।

इस बीच तुर्की के भीतर विद्रोह अथवा उसके ज़िम्मेदारों से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ व्यापक पैमाने पर कार्यवाही हो रही है। सूचना है कि तुर्क अधिकारियों ने गूलन से कथित रूप से संबंध रखने वाले 15000 से अधिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है जबकि इससे एक दिन पहले 8000 पुलिस कर्मियों को भी निलंबित किया जा चुका है।

शिक्षा विभाग ने युनिवर्सिटियों के 1500 से अधिक डीन्ज़ को भी त्यागपत्र सौंपने का आदेश दिया है।

सैनिक विद्रोह विफल होने के बाद न्यायपालिका और सेना से संबंध रखने वाले 6000 लोग पहले ही हिरासत में लिए जा चुके हैं जिनमें 2 हज़ार से अधिक जज भी शामिल हैं।

गिरफ़तार किए गए लोगों में लगभग 100 जनरल और एडिमिरल शामिल हैं। राष्ट्रपति का क़रीबी समझे वाले वाले वरिष्ठ सैनिक अधिकारी भी गिरफ़तार किए गए हैं।

सोमवार को राष्ट्रपति अर्दोग़ान ने कहा कि यदि जनता मांग करे तो वह मौत की सज़ा बहाल करने के लिए तैयार हैं। जबकि फ़्रांस ने धमकी दी है कि यदि तुर्की ने मौत की सज़ा बहाल की तो उसका यूरोपीय संघ में शामिल होने का सपना हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा।

इसी बीच तुर्की में कूटनयिक गलियारों में यह ख़बरें भी गश्त कर रही हैं कि रूसी सेना ने तुर्की के सैनिक विद्रोह का सुराग़ कई घंटा पहले ही लगा लिया था और तुर्क सरकार को इस बारे में सूचित कर दिया था जिससे तुर्क सरकार को विद्रोह विफल बनाने में भारी मदद मिल।

सैनिक विद्रोह के बाद सऊदी अरब के सरकारी टीवी चैनल अलअख़बारिया और अर्ध सरकारी चैनरल अलअरबिया ने सैनिक विद्रोह के पक्ष में रुख़ अपना लिया था जिसके कारण तुर्की और सऊदी अरब के संबंधों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं।