बहरैन में बड़ी संख्या में राजनैतिक कार्यकर्ता सलाख़ों के पीछे
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अनेक रिपोर्टों से पता चलता है कि बहरैन की आले ख़लीफ़ा सरकार देश में राजनैतिक कार्यकर्ताओं के साथ पुलिसिया रवैया जारी रखे हुए उन्हें विभिन्न बहानों से जेलों में ठूंसा जा रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २०, २०१६ १३:३६ Asia/Kolkata

अनेक रिपोर्टों से पता चलता है कि बहरैन की आले ख़लीफ़ा सरकार देश में राजनैतिक कार्यकर्ताओं के साथ पुलिसिया रवैया जारी रखे हुए उन्हें विभिन्न बहानों से जेलों में ठूंसा जा रहा है।

बहरैन की नाइंसाफ़ अदालतों के आदेश पर देश के 26 अन्य राजनैतिक कार्यकर्ताओं को तीन से दस साल की जेल की सज़ा सुनाई गई है। इन लोगों पर पांच से अधिक लोगों के समूह में एकत्रित होने और तनाव फैलाने के प्रयास जैसे आरोप लगाए गए हैं। जेल में भी राजनैतिक बंदियों को भयावह यातनाएं दी जाती हैं और उनसे ज़बरदस्ती अपराध स्वीकार कराए जाते हैं।

 

बहरैन के हालात से पता चलता है कि इस देश की जनता के विरुद्ध आले ख़लीफ़ा की तानाशाही सरकार की ओर से अत्यंत दमनकारी कार्यवाहियां जारी हैं और राजनैतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और उन पर मुक़द्दमा चलाने की प्रक्रिया दिन प्रतिदिन अधिक चिंताजनक होती जा रही है। तानाशाही सरकार ने बहरैन में बड़ी संख्या में राजनैतिक कार्यकर्ताओं को निराधार बहानों से गिरफ़्तार करके लम्बी अवधि के लिए जेलों में ठूंस दिया है। आले ख़लीफ़ा सरकार ने आतंकवाद से संघर्ष के नाम पर बनाए गए क़ानून का सहारा लेकर देश में पुलिसिया नीति लागू कर रखी है। इस क़ानून के अनुसार बहरैन की सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी प्रकार के प्रदर्शन को कुचल दे, किसी भी विरोधी को गिरफ़्तार कर ले और किसी भी गुट या दल को आतंकवाद के समर्थन के बहाने भंग कर दे। बहरैन की तानाशाही सरकार ने 14 फ़रवरी वर्ष 2011 से आरंभ होने वाली जन क्रांति की शुरुआत से ही क्रांतिकारियों, विरोधी नेताओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेने वालों को जेल में डालने की बिल्कुल भी संकोच नहीं किया है। आले ख़लीफ़ा के इस पुलिसिया रवैये और हिंसक नीति के चलते इस समय बहरैन की जेलें राजनैतिक बंदियों से भरी हुई हैं। (HN)